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गर्भावस्था में एनीमिया: हर दूसरी नहीं, लगभग हर महिला के लिए खतरे की घंटी

स्वस्थ मां से ही स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण, एनीमिया नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क

किशनगंज,13अप्रैल(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, गर्भावस्था के दौरान एनीमिया (रक्त की कमी) महिलाओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं, जो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर बढ़ाने का प्रमुख कारण बन सकता है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता अभियान तेज कर दिया है और गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच व दवा वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

महिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शबनम यास्मीन ने बताया कि एनीमिया तब होता है जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। हीमोग्लोबिन शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है। इसकी कमी होने पर कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सांस फूलना और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित होती हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर प्रसव के दौरान जटिलताएं बढ़ सकती हैं और शिशु का वजन कम होने का खतरा रहता है। गंभीर स्थिति में यह मां और शिशु दोनों के लिए जानलेवा भी हो सकता है।

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि जिले में ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के तहत लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को आयरन फोलिक एसिड (आईएफए) की गोलियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) और उपस्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को 180 आयरन एवं कैल्शियम की गोलियां नि:शुल्क दी जा रही हैं। साथ ही उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच भी सुनिश्चित की जा रही है।

उन्होंने बताया कि जिले में आयरन और कैल्शियम टैबलेट वितरण में हाल के दिनों में संतोषजनक प्रगति दर्ज की गई है, जो स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता को दर्शाता है।

सिविल सर्जन ने गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार लेने की सलाह देते हुए कहा कि हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, अनार, अमरूद, केला, गाजर, टमाटर, गुड़, सूखे मेवे, अंडा, मछली और दाल को दैनिक भोजन में शामिल करना चाहिए। इससे शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने में मदद मिलती है।

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनवर हुसैन ने कहा कि एनीमिया एक गंभीर लेकिन रोकथाम योग्य समस्या है। गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर जांच करानी चाहिए और स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी जागरूकता और नियमित देखभाल से मां और शिशु दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे एनीमिया को हल्के में न लें, नियमित जांच कराएं और पोषणयुक्त आहार के साथ चिकित्सकीय सलाह का पालन करें, ताकि स्वस्थ मां से स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण हो सके।

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