
नवेंदु मिश्र
नई दिल्ली -लोकसभा अध्यक्ष ओम बरला ने नई दिल्ली में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “Sustainable Agriculture for Viksit Bharat@2047: Tradition, Technology and Tangible Outcomes” के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।
विकसित भारत 2047 के संकल्प की सफलता कृषि, ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के सशक्त समन्वय पर आधारित है। भारत की कृषि केवल अर्थव्यवस्था का आधार नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण समृद्धि और सामाजिक स्थिरता की भी आधारशिला है। आज जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और Sustainable Development Goals जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच आवश्यक है कि परंपरागत कृषि ज्ञान का समन्वय आधुनिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, Artificial Intelligence, जलवायु-अनुकूल नवाचारों और अनुसंधान आधारित समाधानों के साथ किया जाए।
कृषि का भविष्य केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, पर्यावरणीय संतुलन, किसानों की आय वृद्धि और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं समृद्ध कृषि व्यवस्था के निर्माण से भी जुड़ा है। यही कारण है कि कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार, Climate-Resilient Agriculture तथा तकनीक आधारित समाधान आज विकसित भारत की कृषि यात्रा के प्रमुख आधार बन रहे हैं। विकसित भारत की यात्रा खेतों, खलिहानों और गांवों से होकर ही गुजरेगी तथा किसान, वैज्ञानिक, शिक्षक, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और युवा शक्ति इस परिवर्तन के प्रमुख वाहक होंगे।
मुझे विश्वास है कि इस सम्मेलन से निकले विचार, नवाचार और संकल्प किसानों की समृद्धि, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को नई गति प्रदान करेंगे तथा कृषि को राष्ट्र की प्रगति, पर्यावरणीय संतुलन और जनकल्याण का और अधिक सशक्त आधार बनाएंगे।



