किशनगंज : डायरिया से बचाव के प्रति जागरूकता के लिये पखवाड़ा का दो सप्ताह बढाकर 13 अगस्त तक किया विस्तार।

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किशनगंज/धर्मेन्द्र सिंह, भीषण गर्मी व उमस भरे मौसम में डायरिया का खतरा काफी बढ़ जाता है। डायरिया की वजह से बच्चों व बुजुर्गों में अत्यधिक निर्जलीकरण की वजह से स्थिति बिगड़ने का खतरा रहता है। ये जानलेवा भी हो सकता है। इसीलिये डायरिया से बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से जिले में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा संचालित किया जा रहा है। जिसकी समय सीमा 31 जुलाई तक ही थी लेकिन शतप्रतिशत लक्ष्य के प्राप्ति हेतु इसे अब दो सप्ताह बढाकर 13 अगस्त तक कर दिया गया है जिसमे आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से जहां पांच साल से कम उम्र के बच्चों के बीच ओआरएस व जिंक की दवा वितरित की जा रही है। वहीं हाथों की सफाई, डायरिया से बचाव संबंधी अन्य कारणों के प्रति लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ कौशल किशोर ने बताया कि दूषित जल का सेवन डायरिया के प्रमुख कारणों में से एक है। नियमित दिनचर्या के साथ स्वच्छता का ध्यान रखते हुए डायरिया से काफी हद तक बचा जा सकता है। बरसात के मौसम में जलजमाव होने की वजह से डायरिया के जीवाणु तेजी से विकसित होते हैं। इसलिये घर के आसपास जलजमाव से बचाव और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने बताया की बाल्यावस्था में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में लगभग दस प्रतिशत बच्चों की मृत्यु दस्त के कारण होती है। इस दस्त का एकमात्र उपचार ओआरएस घोल एवं जिंक की गोली है। इस उपचार से बाल मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है, जिसको लेकर डायरिया से बचाव एवं प्रबंधन के संबंध में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा चलाया जा रहा है। प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजन किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य बाल्यावस्था में दस्त के दौरान ओआरएस एवं जिंक के उपयोग के प्रति लोगों में जागरूक करना, समुदाय स्तर तक ओआरएस व जिंक की उपलब्धता और इसके उपयोग को बढ़ावा देना है। साथ ही स्वच्छता के मद्देनजर हाथों को साफ रखने से विभिन्न रोगों से परिवार को सुरक्षित भी रखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस पखवाड़े में ऐसे परिवारों को चिह्नित किया जाएगा, जिनमें 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं। साथ ही पखवाड़े के दौरान दस्त रोग से ग्रसित हों। पांच वर्ष तक के कुपोषित बच्चे वाले परिवार को प्राथमिकता दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से गंदगी वाले जगहों पर निवास करने वाले लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही उन्हें सफाई और स्वच्छता को लेकर जागरूक करना होगा। सिविल सर्जन डॉ कौशल किशोर ने कहा कि डायरिया के कई प्रकार हैं। एक्यूट वाटरी डायरिया, इसमें दस्त काफी पतला होता है। ये कुछ घंटों या कुछ दिन तक ही होता है। इससे निर्जलीकरण एवं अचानक वजन में गिरावट होने का ख़तरा होता है। दूसरा एक्यूट ब्लडी डायरिया, इसे आमतौर पर शूल के नाम से जाना जाता है। इससे आंत में संक्रमण व कुपोषण का खतरा होता है। तीसरा परसिस्टेंट डायरिया, जो 14 दिन या इससे अधिक समय तक रहता है। इसके कारण बच्चों में कुपोषण व संक्रमण का खतरा होता है। चौथे तरह के डायरिया का खतरा अतिकुपोषित बच्चों को ज्यादा रहता है। ये अत्यंत गंभीर किस्म का होता है। इससे संक्रमण, निर्जलीकरण, ह्रदय संबंधित समस्या, विटामिन व जरूरी खनिज लवण की शरीर में कमी की समस्या आती है। जिले में संचालित सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा से संबंधित जानकारी देते अभियान के नोडल अधिकारी सह डीआईओ डॉ देवेन्द्र कुमार ने बताया कि 15 से 30 जुलाई तक संचालित अभियान के क्रम में अब तक जिले के 809 गांवों में चिह्नित परिवारों के बीच ओआरएस का वितरण किया जा चुका है। इससे अब तक कुल लक्ष्य 329857 के आलोक में 259226 से अधिक बच्चे लाभान्वित हुए हैं। अभियान के क्रम में अब तक डायरिया से ग्रसित 184 बच्चों को चिह्नित किया गया है। उन्हें 14 दिन का जिंक व आवश्यकता के हिसाब से ओआरएस उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक जिले के 486 स्थानों में विशेष सत्र आयोजित करते हुए स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मियों की मदद से हाथ धोने के सही तकनीक की जानकारी दी गयी है।

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