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युवा किसानों को प्रोत्साहित कर जैविक खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी सरकार :-विजय कुमार सिन्हा…..

हर जिले में अनुभवी शोधकर्ताओं के साथ किसान करेंगे संवाद

उत्पादकता और गुणवत्ता के संतुलन पर रहेगा विशेष जोर

मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता

त्रिलोकी नाथ प्रसाद /माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में कृषि के भविष्य और जन-स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार न केवल जैविक खेती को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि इस क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवा किसानों को सम्मानित भी करेगी। श्री सिन्हा ने आज कृषि भवन, मीठापुर में उच्चाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में ये बातें कहीं।
श्री सिन्हा ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में सरकार गोबर/बायोगैस को प्रोत्साहित करने के लिए 100 इकाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा इसमें 50 प्रतिशत तक का अनुदान 22500 रूपये का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार पूर्व के वर्षों की भांति पक्का वर्मी कम्पोस्ट इकाई, व्यावसायिक वर्मी कम्पोस्ट इकाई पर अनुदान की व्यवस्था की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 7500 पक्का वर्मी कम्पोस्ट इकाई की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जैविक खेती के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 5700 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती क्रियान्वयन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस योजना में शामिल सभी किसानों को 4000 रूपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान राशि उपलब्ध कराई जायेगी।

कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार लाने के लिए युवाओं का इस ओर आकर्षित होना अनिवार्य है। मंत्री जी ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि हम अपने युवा किसानों को जैविक खेती की आधुनिक तकनीकों से जोड़ेंगे और उनके प्रयासों को राजकीय स्तर पर पहचान दिलाएंगे।

उन्होंने कहा कि जैविक खेती के वैज्ञानिक पक्ष को मजबूत करने के लिए अब हर जिले में अनुभवी रिसचर्स (शोधकर्ताओं) और किसानों की संयुक्त बैठकें आयोजित की जाएंगी। यह पहल न केवल जिला स्तर पर बल्कि राज्य स्तर पर भी क्रियान्वित की जाएगी, ताकि किसानों को सीधे विशेषज्ञों का परामर्श मिल सके और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान हो।

मंत्री श्री सिन्हा ने जैविक खेती के प्रति एक बड़ी शंका को दूर करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा मॉडल तैयार करना है जिससे उत्पाद न घटे और गुणवत्ता बेहतर हो।

उन्होंने जोर दिया कि रसायनों के बिना भी वैज्ञानिक पद्धतियों से उच्च उत्पादकता प्राप्त की जा सकती है।
वर्तमान समय की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के कारण मानव की प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। जैविक खेती के माध्यम से हम मानव स्वास्थ्य की रक्षा करेंगे ताकि आने वाली पीढ़ियों की इम्यूनिटी मजबूत बनी रहे और पर्यावरण को दूषित होने से बचाएंगे और मिट्टी की उर्वरता को पुनर्जीवित करेंगे।

कृषि मंत्री ने कहा कि जैविक खेती केवल एक पद्धति नहीं बल्कि एक जन-आंदोलन बनना चाहिए, जिससे समृद्ध किसान, स्वस्थ समाज और स्वच्छ पर्यावरण का सपना साकार हो सके।

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