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किशनगंज : मेगा क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम में जीविका समूहों को मिला सात करोड़ का ऋण

किशनगंज, 04 जून (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह,
ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जीविका एवं बैंकों की पहल लगातार प्रभावी साबित हो रही है। इसी क्रम में बहादुरगंज में आयोजित मेगा क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम के दौरान सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा 300 से अधिक जीविका स्वयं सहायता समूहों को कुल सात करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) अनुराधा चंद्रा ने कहा कि पूंजी की उपलब्धता से जीविका दीदियों को स्वरोजगार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने में काफी सहूलियत मिल रही है। अब महिलाओं को ऊंची ब्याज दर पर महाजनों से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती। बैंक लिंकेज के माध्यम से कम ब्याज दर पर उपलब्ध ऋण से वे कृषि, पशुपालन, लघु व्यवसाय एवं अन्य आयवर्धक गतिविधियों को विकसित कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के रिजनल मैनेजर नीरज ज्योतिर्मय ने कहा कि जीविका और बैंक के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर संवाद से स्वयं सहायता समूहों को अधिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सुलभ बैंक ऋण की उपलब्धता महिलाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इस अवसर पर बहादुरगंज प्रखंड के महादेव दिघी, नटवा पाड़ा एवं कटहलबाड़ी, दिघलबैंक शाखा, ठाकुरगंज प्रखंड के डुमरिया तथा पोठिया प्रखंड के चनामना शाखा क्षेत्र के स्वयं सहायता समूहों को ऋण राशि उपलब्ध कराई गई।

कार्यक्रम में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के डीआरएम अभिजीत सिन्हा, बैंक अधिकारी प्रज्ज्वल कुमार, बीपीएम बहादुरगंज वरुण कुमार जायसवाल, ठाकुरगंज बीपीएम अमरेश अंशुमान, प्रभारी प्रबंधक वित्तीय समावेशन मुकुल कुमार, जीविका कर्मी अंसार अहमद, रविंदर, राजेश, विभिन्न शाखाओं के बैंक मित्र, जीविका दीदियां एवं कैडर मौजूद रहे।

बैंक लिंकेज के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए जीविका कैडर केम्पी सिन्हा, नंदिता, लक्ष्मी, नसीहत और तरन्नुम को सम्मानित भी किया गया।

जीविका के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को परिक्रामी निधि, सामुदायिक निवेश निधि तथा बैंक लिंकेज के जरिए ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले में करीब 24 हजार स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी तीन लाख से अधिक जीविका दीदियां इस सुविधा का लाभ उठाकर स्वरोजगार के विभिन्न साधन विकसित कर रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है।

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