बेड़ो के 21 पाड़हा जेठ जतरा में शामिल हुईं मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, बोलीं – “जतरा हमारी सांस्कृतिक आत्मा और जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संकल्प”

बेड़ो, 10 मई: झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की रविवार को बेड़ो के टेंगरिया में आयोजित 21 पाड़हा जेठ जतरा में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने जतरा को आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक एकता और जल, जंगल एवं जमीन की रक्षा के संकल्प का प्रतीक बताया। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि इस ऐतिहासिक एवं पारंपरिक आयोजन में शामिल होकर उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहरे जुड़ाव और गौरव की अनुभूति हुई। उन्होंने कहा कि जेठ जतरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि पुरखों की अमूल्य धरोहर और आदिवासी अस्मिता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सदियों पुरानी पाड़हा व्यवस्था, पारंपरिक रीति-रिवाज और सामुदायिक संस्कृति आज भी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े हुए हैं तथा आदिवासी पहचान को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। कार्यक्रम में विभिन्न गांवों से पहुंचे खोड़हा दलों ने पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-नगाड़ों, लकड़ी के घोड़ों, झंडों और लोकनृत्यों के माध्यम से आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। मंत्री ने इन प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि यह आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत और जीवंत सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में गांवों के लोग ही ऐसे आयोजनों के माध्यम से संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। जतरा केवल सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है। मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे आयोजनों में भाग लेकर लोगों का मनोबल बढ़ाएं और आने वाली पीढ़ियों तक सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाएं।
इस अवसर पर उप प्रमुख मोदशिर हक, अजीत तिर्की, रोशन तिर्की, फ़हीमुल हक, शम्भू बैठा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं गणमान्य लोग मौजूद थे।


