ठाकुरगंज : पंचायत सरकार भवन में दरार को लेकर पूर्व मंत्री नौशाद आलम का बयान आया सामने

ठाकुरगंज, 28 अगस्त (के.स.)। बन्दरझूला पंचायत सरकार भवन के निर्माण पूर्ण होने के कुछ ही समय बाद भवन के विभिन्न हिस्सों में दरारें दिखाई देना गंभीर चिंता का विषय है। यह महज भवन की दीवारों पर आई दरार का मामला नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भवन हाल ही में बनकर तैयार हुआ है, तो इतनी जल्दी इसमें दरारें क्यों आईं? क्या निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों और गुणवत्ता का सही तरीके से पालन किया गया था? क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, नींव, संरचना और तकनीकी मानकों की पर्याप्त जांच की गई थी?
दरार आने के बाद केवल उसकी मरम्मत करा देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। पहले यह पता लगना चाहिए कि दरार आखिर किस कारण से आई। यदि मूल कारण सामने नहीं आया और केवल दरारों पर मरम्मत कर दी गई, तो भविष्य में समस्या दोबारा गंभीर रूप ले सकती है।
किशनगंज क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से भी संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में सरकारी भवनों के निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही को सामान्य घटना मानना जनता की सुरक्षा के साथ समझौता होगा।
इस मामले में भवन की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री, डिजाइन, नींव और निर्माण प्रक्रिया की जांच विशेषज्ञों की टीम से होनी चाहिए। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
सरकारी भवन जनता के पैसे से बनते हैं। इसलिए सवाल सिर्फ एक भवन की दरार का नहीं, बल्कि सरकारी धन, निर्माण की गुणवत्ता और आम लोगों की सुरक्षा के प्रति जवाबदेही का है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस मामले को महज मरम्मत तक सीमित रखता है या दरार के वास्तविक कारण तक पहुंचकर दोषियों की जिम्मेदारी भी तय करता है। पंचायत सरकार भवन में दरार मामले को लेकर बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सह उर्दू एडवाइजरी अध्यक्ष बिहार नौशाद आलम ने उच्च पदाधिकारियों से जांच कर अग्रिम कार्रवाई करने की मांग की है।



