राज्य

पूर्वी चम्पारण जिला के ग्राम सिसवा में ‘‘बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव’’ 2026 का आयोजन किया गया है।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/इस कार्यक्रम का उद्धाटन जद यू0 विधायक दल के नेता, ग्रामीण विकास, सूचना एवं जन-संपर्क विभाग के माननीय मंत्री -सह-पूर्वी चम्पारण जिला के प्रभारी मंत्री श्री श्रवण कुमार जी तथा जनता दल यू0 के प्रदेष अध्यक्ष-सह-माननीय विधायक श्री उमेश सिंह कुशवाहा जी तथा वाल्मीकिनगर के माननीय सांसद श्री सुनील कुमार ने संयुक्त रूप के की।

इस अवसर पर सम्मानित अतिथि के रूप में सिकटा के विधायक श्री समृद्ध वर्मा, नरकटियागंज विधायक श्री विशाल कुमार शाह, पूर्व सांसद श्री राम कुमार शर्मा पूर्व विधान पार्षद श्री सतीश प्रसाद, श्री विरेन्द्र सिंह दांगी।
‘बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव 2026‘ के मुख्य अतिथि के रूप में वट्ट थाई बुद्ध टेम्पल केसरिया के प्रमुख बौद्ध भिक्षुक डाॅ0 पी0सी0 चन्द्रा श्री तथा पूर्व माननीय सांसद स्व0 बैजनाथ प्रसाद महतो, जिनके प्रयास से सिसवा में भगवान बुद्ध की प्रतिमा को स्थापित किया गया
बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव की अध्यक्षता आनन्द कुशवाहा तथा मंच संचालन श्री संजय सिंह कुशवाहा ने की।
इस अवसर पर शम्भु कुशवाहा, भरत पटेल, रतन पटेल, जगबहादुर कुशवाहा, नार्गाजुन कुशवाहा, कन्हैया कुशवाहा मौजूद थे।
बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव पर माननीय मंत्री जी ने बुद्ध महोत्सव को संबोंधित करते हुए कहा है कि आज पूर्वी चम्पारण जिले के ग्राम ‘सिसवा‘ की इस पावन धरती पर आयोजित बुद्ध महोत्सव में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे प्रसन्नता और गौरव की अनुभूति हो रही है।
यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है बल्कि शान्ति करूणा, मानवता और विश्व बंधुत्व का संदेश देने वाला एक आध्यात्मिक पर्व है।
मैं इस भव्य आयोजन के लिए आयोजक समिति, ग्राम वासियों तथा सभी सहयोगी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।
बिहार की धरती सदियों से ज्ञान, तप, त्याग और आध्यात्मिक चेतना की भूमि रही है। यही वह पावन प्रदेश है, जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया, मानवता को मध्यम मार्ग का संदेश दिया, और पुरी दुनिया को अहिंसा और करूणा का मार्ग दिखाया।
पूर्वी चम्पारण की यह भूमि भी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण रही है।
ग्राम सिसवा में थाइलैण्ड के सहयोग से स्थापित 25 फीट लंबी भगवान बुद्ध की भव्य प्रतिमा, इस क्षेत्र में पहचान बन चुकी है।
भगवान बुद्ध की यह प्रतिमा केवल पत्थर की आकृति नहीं बल्कि भारत और थाइलैण्ड के बीच सांस्कृतिक मैत्री बौद्ध परम्परा और वैश्विक शान्ति का प्रतीक है।
वर्ष 2015 में बिहार के पूर्व माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के कर-कमलों द्वारा इस भव्य प्रतिमा का लोकार्पण किया गया था।
श्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में बिहार में ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास को नई गति मिली। उन्होनें नालन्दा विश्वविद्यालय के पुनर्जीवन, बौद्ध सर्किट के विकास, राजगीर, बोधगया, केशरिया और वैशा ली जैसे स्थलों के संरक्षण तथा पर्यटन सुविधाओं के बिस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
सिसवा में भगवान बुद्ध की प्रतिमा का लोकार्पण भी इसी सांस्कृतिक दृष्टि और विकास सोच का परिणाम है।
ग्राम सिसवा में भगवान बुद्ध की भव्य प्रतिमा के निर्माण में थाइ मंदिर प्रमुख डाॅ0 पी0सी0चन्द्रा, श्री जी का अत्यन्त महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने भारत और थाईलैण्ड के सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भुमिका निभाई।
भगवान बुद्ध के उपदेशो को जिन देशो ने अपनाया वे आज विश्व में शान्ति विकास और समृद्धि का उदाहरण बने हैं। चीन, जापान, थाईलैण्ड, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और श्रीलंका जैसे देशो ने बुद्ध के उपदेशो
और संदेशो को अपने जीवन और शासन में स्थान दिया। परिणाम स्वरूप वहाँ शिक्षा, अनुशा
सन, तकनीकि, पर्यटन और सामाजिक सद्भाव के क्षेत्र में अद्भुत विकास हुआ।
भगवान बुद्ध ने कहा था ‘‘स्वयं अपने दीपक बनो‘‘ यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारो वर्ष पूर्व था। आज का समाज अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है। हिंसा, तनाव, समाजिक विभाजन और नैतिक पतन जैसी समस्याएँ विश्व के सामने खड़ी हैं। ऐसे समय में भगवान बुद्ध का विचार मानवता को नई दिशा
प्रदान कर सकते हैं।
थाइलैंड और भारत का संबंध सदियों पुराना हैं। बौद्ध धर्म ने दोनों देषों को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का काम किया है। थाइलैंड के लोगों को भी भगवान बुद्ध के प्रति अटूट श्रद्धा है। सिसवा में भगवान बुद्ध की प्रतिमा की स्थापना इस अन्तरराष्ट्रीय मैत्री और सांस्कृतिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती रहेगी कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिकता सीमाओं से परे मानवता को जोड़ने का कार्य करती हैं।
इस बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ कि इन्होंने बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। बोधगया, राजगीर, वैशाली और नालन्दा जैसे स्थलों का विकास विश्वस्तरीय स्तर पर किया जा रहा हैं। इससे बिहार का सांस्कृतिक पहचान विश्ववभर में मजबूत हुई है।
सिसवा का बुद्ध महोत्सव भी आनेवाले समय में राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाएगा, ऐसा मुझे पूर्ण विशवास हैं।
मैं विशेष रूप से इस आयोजन समिति के अध्यक्ष जी, समिति के सभी सदस्यगण, स्थानीय ग्राम वासियों, युवाओं और सभी श्रद्धालुओं की सराहना करना चाहता हूँ जिन्होंने इस महोत्सव को सफल बनाने में अपना योगदान दिया, किसी भी सांस्कृतिक आयोजन की सफलता समाज के सामूहिक भागीदारी से ही संभव होती है। सिसवा के लोगों ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए आगे आता है, तब इतिहास का निर्माण होता है।

अन्त में मैं भगवान बुद्ध से प्रार्थना करता हूँ कि हम सभी को सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें। हमारे समाज में शान्ति, प्रेम, भाईचारा और सद्भाव बना रहें और यह बुद्ध महोत्सव मानवता के कल्याण का संदेष लेकर निरन्तर आगे बढ़ता रहे और ग्राम सिसवा ज्ञान, करूणा तथा सांस्कृतिक चेतना का केन्द्र बने।आप सभी को बुद्ध महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ।

 

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!