लाल किले पर लगातार सातवें वर्ष बिहार की झांकी का शामिल नहीं होना काफी दुखद – उमेश सिंह कुशवाहा

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बिहार के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे पीएम मोदी: उमेश सिंह कुशवाहा

लाल किले पर लगातार सातवें वर्ष बिहार की झांकी का शामिल नहीं होना काफी दुखद

 

25 जनवरी 2023, पटना ।

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने का सपना दिखाकर वोट मांगने वाले भाजपा के लोग देश में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा रहे हैं और गणतंत्र दिवस पर देशवासियों को जुल्म, ज्यादती और अत्याचार का तोहफा दे रहे हैं। साथ ही देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने पर तुले हुए हैं।

प्रदेश अध्यक्ष ने लगातार सातवें वर्ष गणतंत्र दिवस पर निकलने वाली झांकियों में बिहार की झांकी के नहीं दिखाए जाने पर आक्रोश व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा की यह भाजपा के बिहार विरोधी रवैये का एक प्रमाण है। भाजपा द्वारा विपक्ष की राज्य सरकारों के प्रति अपनाए जाने वाले अलोकतान्त्रिक व्यवहार को बिहार और देश की जनता बर्दाश्त नहीं करने वाली। भाजपा लोक, गण और तंत्र तीनों की गरिमा और मर्यादा को लगातार तार-तार करने में लगी हुयी है।

उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि लाल किला के सामने राजपथ पर निकलने वाली झांकी को पूरी दुनिया देखती है। इन झांकियों से राज्यों की कला, संस्कृति और विकास को जानने- समझने का अवसर देश और दुनिया को मिलता है। भाजपा के नेता सिर्फ बड़ी-बड़ी बात करते हैं पर उनका सारा काम गणतंत्र की जननी बिहार के विरुद्ध होता है। दूसरी ओर हमारे जनप्रिय नेता श्री नीतीश कुमार बिहार और बिहारियों के मान, सम्मान और विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को दिल्ली के राजपथ पर निकलने वाली झांकियों का चयन करने वाली केंद्र सरकार की एक्सपर्ट कमेटी ने बिहार सरकार द्वारा भेजी गयी झांकी को मानकों पर खरा नहीं उतरने का बहाना बनाकर खारिज किया है जो काफी दुखद है। राज्य सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने गया में फल्गु नदी पर बने रबड़ डैम को बिहार की झांकी के रूप में प्रस्तुत करने का प्रस्ताव भेजा था। देश और दुनिया के लोगों को पितृतर्पण की सुविधा प्रदान करना से उनको चिढ क्यों है? जबकि 2022 के गणतंत्र दिवस समारोह के लिए भेजी गयी झांकी के प्रस्ताव का थीम ‘‘गांधी के पदचिह्नों पर अग्रसर बिहार’’ था, वर्ष 2021 व 2020 में जल- जीवन – हरियाली तथा 2019 में शराबबंदी की थीम पर भेजी गयी झांकी को भी स्थान नहीं मिला, जबकि 2018 में छठ जैसे लोकआस्था के महापर्व पर भेजी गयी झांकी और 2017 में विक्रमशिला जैसे प्राचीनतम शैक्षणिक संस्थान की थीम पर भेजे गए प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया गया था।

उन्होंने सवाल किया कि विकास का ढिंढोरा पीटने वाली मोदी सरकार क्या विकास के नए प्रतिमान स्थापित करने वाली बिहार एवं अन्य विपक्षी दलों की राज्य सरकार के योजनाओं की झांकी से भी डरती है। बिहार के साथ ही इस बार छत्तीसगढ़, पंजाब की झांकी शामिल नहीं की गयी। 2022 में भी बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल सहित गैर भाजपा शासित राज्यों की झांकियों को शामिल नहीं किया गया। भाजपा के गणतंत्र विरोधी और नफरत की राजनीति को पूरा देश समझ चुका है और उन्हें इसका करारा जवाब बिहार और देश की जनता 2024 में देगी।