सहरसा : नशे के खिलाफ परिवार, समाज और पुलिस को मिलकर लड़ना होगा : डीआईजी
जागरूकता, संवाद और सामुदायिक सहभागिता को बताया नशामुक्ति का प्रभावी हथियार

सहरसा, 19 सितंबर (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह/अजय कुमार, कोशी क्षेत्र के डीआईजी डॉ. कुमार आशीष ने कहा कि नशा केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ी के भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। खासकर युवाओं में नशीले पदार्थों का बढ़ता आकर्षण चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए परिवार, विद्यालय, समाज और पुलिस को मिलकर काम करना होगा।
डीआईजी ने कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी और बिक्री करने वालों के खिलाफ पुलिस लगातार कानूनी कार्रवाई कर रही है, लेकिन किसी युवा को नशे की पहली खुराक लेने से रोकने में परिवार, शिक्षक और समाज की भूमिका अहम है। अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार में अचानक होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। मित्र-मंडली में बदलाव, पढ़ाई से दूरी, चिड़चिड़ापन, एकांतप्रियता, असामान्य रूप से पैसे की मांग अथवा व्यवहार में लगातार परिवर्तन जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उन्होंने अभिभावकों से बच्चों से पूछताछ के बजाय संवाद स्थापित करने की अपील की। बच्चों को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि परेशानी की स्थिति में परिवार उनके साथ खड़ा है।
डीआईजी ने विद्यालय और महाविद्यालयों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों में तनाव, मानसिक दबाव और व्यवहारगत बदलावों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए। युवाओं को खेल, रचनात्मक गतिविधियों, कौशल विकास और सामाजिक कार्यों से जोड़कर नशे से दूर रखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि समाज में यदि कहीं नशीले पदार्थों की बिक्री या तस्करी की जानकारी मिले तो इसकी सूचना पुलिस को दें। सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने कहा कि नशे के शिकार लोगों को केवल अपराधी के रूप में देखने के बजाय कई मामलों में उन्हें उपचार और पुनर्वास की जरूरत वाले व्यक्ति के रूप में भी समझना चाहिए। अपराधियों पर कार्रवाई और नशे से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशीलता, दोनों साथ चलनी चाहिए।



