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राज हॉस्पिटल्स हिंसा मामला: IMA Hospital Board of India ने जताया कड़ा विरोध, अस्पतालों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून लागू करने की मांग: डॉ.अभिषेक रामाधीन

रांची:  04 जुलाई 2026 को रांची स्थित राज हॉस्पिटल्स में हुई हिंसा और तोड़फोड़ की घटना पर IMA Hospital Board of India, झारखंड राज्य शाखा ने गहरा विरोध दर्ज कराते हुए इसे स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया है। संगठन ने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों पर बढ़ती हिंसा न केवल चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित कर रही है, बल्कि गंभीर मरीजों के उपचार में भी बाधा उत्पन्न कर रही है। आईएमए हॉस्पिटल बोर्ड के अनुसार, राज हॉस्पिटल्स में भर्ती गंभीर सड़क दुर्घटना के शिकार मरीज का लगभग 40 दिनों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा लगातार उपचार किया गया। सभी चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद मरीज को बचाया नहीं जा सका। इसके बाद अस्पताल परिसर में हुई हिंसा और तोड़फोड़ की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। संगठन का कहना है कि इस तरह की घटनाएं डॉक्टरों का मनोबल गिराने के साथ-साथ अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था को भी प्रभावित करती हैं। आईएमए ने यह भी कहा कि चिकित्सा विज्ञान में प्रत्येक मरीज को बचाने का हरसंभव प्रयास किया जाता है, लेकिन हर मामले में अनुकूल परिणाम की गारंटी संभव नहीं होती। उपचार संबंधी किसी भी विवाद का समाधान कानून और स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए, न कि हिंसा या उपद्रव के जरिए।

यह पहली घटना नहीं

संगठन ने कहा कि राज हॉस्पिटल्स की घटना कोई एकाकी मामला नहीं है। कुछ माह पूर्व रांची के सैमफोर्ड हॉस्पिटल में भी चिकित्सकों और अस्पताल कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार तथा हिंसा की घटना सामने आई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि अस्पतालों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगी तो इसका प्रतिकूल असर पूरे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता पर पड़ेगा।

IMA Hospital Board of India की प्रमुख मांगें

– अस्पतालों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी एवं कठोर कानूनी प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

– अस्पतालों में हिंसा एवं तोड़फोड़ करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध त्वरित एवं कठोर कार्रवाई की जाए।

– चिकित्सा संबंधी विवादों के समाधान के लिए विधिसम्मत एवं संस्थागत तंत्र को प्राथमिकता दी जाए।

– मीडिया किसी भी संवेदनशील चिकित्सकीय घटना के प्रकाशन या प्रसारण से पहले सभी पक्षों का तथ्यात्मक पक्ष अवश्य प्राप्त करे, ताकि समाज तक संतुलित और सत्य जानकारी पहुंचे।

संगठन ने समाज से अपील करते हुए कहा कि अस्पताल जीवन बचाने के केंद्र हैं, संघर्ष के नहीं। चिकित्सकों और मरीजों के बीच विश्वास बनाए रखना समाज की साझा जिम्मेदारी है। अस्पतालों में हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती और इसके प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जानी चाहिए।

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