संशोधन विधेयक झारखंड के लिए आर्थिक चोट, हर स्तर पर होगा विरोध : दीपिका पांडेय सिंह

13 अगस्त 2026:रांची। झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने खनिज वहन भूमि उपकर (JMBL Cess) एवं प्रस्तावित MMDR संशोधन विधेयक 2026 को राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन से झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित होगी। राज्य सरकार इस मुद्दे पर हर स्तर पर विरोध दर्ज कराएगी।मंत्री ने कहा कि झारखंड जैसे राज्य के गर्भ में प्रचुर खनिज संपदा मौजूद है। ऐसे में खनिज संपदाओं से जुड़े राजस्व पर केंद्र सरकार की शर्तों के जरिए नियंत्रण लगाना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि JMBL Cess न तो नई रॉयल्टी है और न ही खनिज उत्पादन पर लगाया गया अतिरिक्त रॉयल्टी शुल्क। यह उस भूमि पर लगाया जाने वाला उपकर है, जिसके भीतर खनिज मौजूद हैं और जिनका खनन किया जा रहा है। दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि जुलाई 2024 में सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने Mineral Area Development Authority बनाम Steel Authority of India Limited मामले में महत्वपूर्ण निर्णय दिया था। इसके बाद झारखंड विधानसभा ने झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस अधिनियम, 2024 पारित किया। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा झारखंड के लिए आर्थिक समृद्धि का आधार है, लेकिन खनन गतिविधियों के कारण राज्य के लोगों को विस्थापन, भूमि से बेदखली, पर्यावरणीय क्षति, जल एवं वायु प्रदूषण, वन क्षेत्रों पर दबाव तथा सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने खनिज संपदाओं से प्राप्त आर्थिक लाभ का एक हिस्सा खनन प्रभावित क्षेत्रों और जनकल्याणकारी योजनाओं में लगाने का निर्णय लिया है। मंत्री के अनुसार, JMBL Cess से प्राप्त राजस्व में लगातार वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹1,379 करोड़, 2025-26 में ₹7,488 करोड़ तथा 2026-27 में अनुमानित ₹13,215 करोड़ की राशि इसके महत्व को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि JMBL Cess से प्राप्त राशि का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास, पेयजल एवं स्वच्छता, कृषि एवं आजीविका, आधारभूत संरचना तथा अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा रहा है। इसलिए JMBL Cess झारखंड के लिए केवल राजस्व का स्रोत नहीं, बल्कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास का महत्वपूर्ण वित्तीय आधार भी है। दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार से झारखंड के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित संशोधन पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा, “झारखंड के अधिकारों और हितों के साथ हो रही हकमारी पर हम चुपचाप बैठने वाले नहीं हैं। कांग्रेस और गठबंधन सरकार केंद्र सरकार के इस संशोधन विधेयक का हर स्तर पर विरोध करेगी।”

