विशेष भूमि सर्वेक्षण में धीमी रफ्तार पर सख्ती, 15 दिन में देनी होगी कार्ययोजना : डॉ. दिलीप जायसवाल
रैयत के अधिकारों की सुरक्षा के लिए शुद्ध और समयबद्ध सर्वेक्षण जरूरी
कम प्रगति वाले जिलों-अंचलों की अलग से करें समीक्षा, लगातार खराब प्रदर्शन पर पदाधिकारी-कर्मी होंगे जवाबदेह
हर सोमवार नोडल अधिकारी देंगे मौजावार प्रगति की रिपोर्ट
त्रिलोकी नाथ प्रसाद/पटना : राज्य में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण की धीमी प्रगति को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभागीय समीक्षा के दौरान माननीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण में केवल लक्ष्य पूरा करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि रैयतों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अभिलेखों की शुद्धता और काम की समयबद्धता दोनों सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कम प्रगति वाले जिलों और अंचलों की अलग से समीक्षा करने तथा अगले 15 दिनों की विशेष कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
माननीय मंत्री ने कहा कि भूमि सर्वेक्षण महज जमीन की नापी नहीं, बल्कि सही रैयत, सही खेसरा, सही रकबा और सही भूमि अभिलेख तैयार करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसलिए कार्य में अनावश्यक देरी किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण ऐसा होना चाहिए जिस पर राज्य का रैयत विश्वास कर सके।
कम प्रगति वाले जिलों-अंचलों पर होगी सीधी नजर
माननीय मंत्री ने निर्देश दिया कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रगति नहीं करने वाले जिलों और अंचलों को चिन्हित कर अलग से समीक्षा की जाए। संबंधित पदाधिकारियों से धीमी प्रगति का कारण पूछा जाए और सुधार के लिए स्पष्ट समय-सीमा के साथ विशेष कार्ययोजना तैयार कराई जाए।
उन्होंने अगले 15 दिनों की कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए कहा कि बिना उचित कारण लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले पदाधिकारी और कर्मी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकेंगे। ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं बेहतर प्रदर्शन करने वाले पदाधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
हर सोमवार सामने आएगी मौजावार प्रगति
विशेष भूमि सर्वेक्षण की जमीनी स्थिति पर नियमित निगरानी के लिए प्रत्येक सोमवार नोडल अधिकारी सभी जिलों की मौजावार प्रगति उपलब्ध कराएंगे। मंत्री ने कहा कि प्रत्येक मौजा किस चरण में है, इसकी स्पष्ट और अद्यतन जानकारी विभाग के पास होनी चाहिए।
स्वघोषणा, खानापुरी, नक्शा, प्रारूप प्रकाशन, दावा-आपत्ति और अंतिम प्रकाशन सहित प्रत्येक चरण के लंबित कार्यों के लिए समय-सीमा निर्धारित करने का निर्देश दिया गया। इससे यह स्पष्ट होगा कि किस जिले और अंचल में किस स्तर पर काम लंबित है और देरी के लिए कौन जिम्मेदार है।
जल्दबाजी में अभिलेखों की शुद्धता से समझौता नहीं
माननीय मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि लक्ष्य पूरा करने की जल्दबाजी में भूमि अभिलेखों की शुद्धता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाए। रैयत का नाम, खेसरा, रकबा, चौहद्दी और उपलब्ध दस्तावेजों का सावधानीपूर्वक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि सही सर्वेक्षण ही रैयत के अधिकारों की सुरक्षा का आधार है। सर्वेक्षण में एक छोटी गलती भी भविष्य में भूमि विवाद का कारण बन सकती है। इसलिए गति के साथ गुणवत्ता और पारदर्शिता पर समान रूप से ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि सही सर्वेक्षण ही राज्य में खुशहाली का आधार होगा। आज जमीन विवाद के कारण राज्य me अधिकतम अपराध की घटनाएं घट रही हैं।
लंबित दावा-आपत्तियों के निष्पादन में भी तेजी
विभाग के सचिव श्री जय सिंह ने समीक्षा के दौरान डेटा के आधार पर सभी जिलों के बंदोबस्त अधिकारियों से बात की और समय सीमा में कार्य पूर्ण करने पर जोर दिया। उन्होंने लंबित दावा-आपत्तियों की अधिकारीवार सूची तैयार कर पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादित करने का निर्देश दिया। उन्होंने तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान कराने तथा डैशबोर्ड के माध्यम से साप्ताहिक समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा।
डैशबोर्ड में जिला और अंचलवार लक्ष्य, उपलब्धि, लंबित मामले और देरी के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज होंगे। लापरवाह कर्मियों की जानकारी भी इसमें शामिल करने का निर्देश दिया गया है, ताकि काम की प्रगति के साथ जिम्मेदारी भी तय की जा सके। उन्होंने फील्ड में अधिकारियों कर्मचारियों की उपस्थित सुनिश्चित करने के साथ मौजा में शिविर लगाकर समस्या के समाधान के निर्देश दिए।
बैठक में विभाग के अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल, उपनिदेशक श्रीमती मोना झा, सहायक निदेशक श्री सुबोध कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री अनुपम प्रकाश, सहायक निदेशक-सह-जनसंपर्क पदाधिकारी सुश्री जूही कुमारी, अनुदेशक श्री आशुतोष कुमार, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी श्रीमती अनुजा सिन्हा, श्रीमती पल्लवी सहित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।



