किशनगंज : गलगलिया चेक पोस्ट से पहले वाहनों का खड़ा रहना जांच का विषय
किशनगंज, 19 सितंबर (के.स.)। गलगलिया थाना क्षेत्र में चेकपोस्ट से पूर्व कोयला लदे वाहनों की लंबी कतार और ओवरलोड वाहनों के परिचालन को लेकर उठे सवालों पर जिला परिवहन पदाधिकारी, किशनगंज की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया है। विभाग का कहना है कि संबंधित वाहनों की जांच परिवहन विभाग के EI एवं ESI द्वारा की गई तथा नियमों के उल्लंघन पर चालान और दंड की कार्रवाई भी की गई।
विभाग के अनुसार, जांच के दौरान अधिकांश कोयला लदे वाहन निर्धारित वजन सीमा के भीतर पाए गए। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क पर वाहनों की लंबी कतार दिखाई देने मात्र से कतार में खड़े सभी वाहनों को ओवरलोड मानना उचित नहीं है। जांच में केवल वजन ही नहीं, बल्कि ओवर-हाइट, लेटरल प्रोजेक्शन, वाहन में बदलाव तथा दस्तावेजों की भी जांच की जाती है।
लेकिन विभाग के इस स्पष्टीकरण के बाद भी एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है-क्या गलगलिया चेकपोस्ट पर गुजरने वाले प्रत्येक कोयला लदे वाहन का वास्तविक वजन काटा/वे-ब्रिज के माध्यम से जांचा जाता है? यदि किसी वाहन का वजन निर्धारित सीमा में होने की पुष्टि की जाती है, तो उस जांच का रिकॉर्ड किस स्तर पर दर्ज होता है और क्या आवश्यकता पड़ने पर उसका विवरण सार्वजनिक किया जा सकता है? और नंबर प्लेट स्पष्ट नहीं दिखने वाले कितने वाहनों पर कार्रवाई हुई है?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि कुछ वाहनों में ओवरलोडिंग नहीं पाई जाती, लेकिन ओवर-हाइट, लेटरल प्रोजेक्शन या दस्तावेज संबंधी अनियमितता मिलती है, तो क्या प्रत्येक ऐसे वाहन के खिलाफ चालान की कार्रवाई होती है? विभाग ने कार्रवाई किए जाने की बात कही है, लेकिन जांच की पारदर्शिता के लिए कुल कितने वाहनों की जांच हुई, कितने वाहनों का वजन हुआ, कितनों में ओवरलोडिंग मिली और कितने वाहनों पर ओवर-हाइट अथवा अन्य उल्लंघन के लिए चालान किया गया-इन आंकड़ों से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
गौरतलब है कि गलगलिया चेकपोस्ट को लेकर प्रशासन पहले भी निगरानी और जांच व्यवस्था को मजबूत करने की बात कह चुका है। 2024 में डीएम के औचक निरीक्षण के दौरान सभी वाहनों की जांच, 24×7 निगरानी और आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल की दिशा में निर्देश दिए गए थे। वहीं मार्च 2026 में गलगलिया में नए चेकपोस्ट के निर्माण और बंगाल से बिहार आने वाले वाहनों की निगरानी बढ़ाने की बात भी सामने आई थी।
ऐसे में अब सवाल किसी एक वाहन को ओवरलोड बताने का नहीं, बल्कि जांच की पूरी प्रक्रिया कितनी प्रभावी और पारदर्शी है, इसका है। यदि विभाग नियमित रूप से कार्रवाई कर रहा है तो जांच किए गए वाहनों, किए गए चालान और वजन जांच के आंकड़े सामने आने से कई सवालों का स्वतः जवाब मिल सकता है।
सवाल यह भी है कि क्या चेकपोस्ट से गुजरने वाले प्रत्येक कोयला लदे वाहन की वजन जांच होती है, या फिर चयनित वाहनों की ही जांच की जाती है? विभागीय रिकॉर्ड इस सवाल की स्थिति को स्पष्ट कर सकता है।
परिवहन विभाग यह भी स्पष्ट करे कि 18 सितंबर 2026 को बिहार से बंगाल जाने वाले वाहनों को गलगलिया चेकपोस्ट क्षेत्र में कुल कितने कोयला लदे वाहनों की जांच की गई, कितने वाहनों पर जुर्माना लगाया गया और किन-किन नियमों के उल्लंघन के संबंध में चालान किया गया। यदि विभाग द्वारा ओवरलोडिंग के साथ-साथ ओवर-हाइट, लेटरल प्रोजेक्शन, अल्टरेशन एवं दस्तावेज संबंधी कमियों की जांच की गई थी, तो प्रत्येक श्रेणी में की गई कार्रवाई का आंकड़ा सामने आने से स्थिति और स्पष्ट होगी।
हालांकि, विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए चालान संबंधी एक वीडियो में 5 सितंबर 2026 को ओवर-हाइट के मामले में जुर्माना किए जाने की कार्रवाई दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल यह है कि 18 सितंबर को जांच के दौरान कितने वाहनों में ओवर-हाइट या अन्य नियमों का उल्लंघन पाया गया और कितने वाहनों पर कार्रवाई की गई?
विभाग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि वाहनों की नियमित जांच की जा रही है और नियमों के उल्लंघन पर नियमानुसार चालान किया जाता है। ऐसे में जांच व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए 18 सितंबर की कार्रवाई का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
सवाल यह भी है कि चेकपोस्ट से गुजरने वाले प्रत्येक कोयला लदे वाहन की जांच और वजन का रिकॉर्ड किस रूप में दर्ज किया जाता है? यदि सभी वाहनों की जांच की जाती है तो 18 सितंबर की जांच रिपोर्ट में कुल कितने वाहन शामिल थे और उनमें कितनों के खिलाफ कार्रवाई हुई-इसका विभागीय रिकॉर्ड क्या कहता है?



