किशनगंज : जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर डीएम ने दिए सख्त निर्देश

किशनगंज,18मई(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले जैव चिकित्सा अपशिष्टों के सुरक्षित निस्तारण को लेकर सोमवार को समाहरणालय सभाकक्ष में जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी विशाल राज ने की। इस दौरान सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली-2016 के अनुपालन की समीक्षा की गई।
बैठक में डीएम ने सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी को निर्देश दिया कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, निजी नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब एवं स्वास्थ्य संस्थानों में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों से निकलने वाले संक्रमित कचरे का सही तरीके से निस्तारण नहीं होने पर संक्रमण फैलने के साथ पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
डीएम ने निजी संस्थानों की नियमित निगरानी और निरीक्षण के लिए तीन सदस्यीय दल गठित कर अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुरूप अपशिष्ट पृथक्करण, सुरक्षित भंडारण, परिवहन और अंतिम निस्तारण की वैज्ञानिक व्यवस्था करनी होगी। बैठक में सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने जैव चिकित्सा अपशिष्ट की विभिन्न श्रेणियों एवं उनके वैज्ञानिक निस्तारण की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि येलो श्रेणी के कचरे का निस्तारण भस्मीकरण एवं गहरे गड्ढे में दफनाकर किया जाता है, जबकि रेड श्रेणी के कचरे का उपचार ऑटोक्लेविंग और रासायनिक कीटाणुशोधन के माध्यम से किया जाता है।
उन्होंने बताया कि अब सरकारी अस्पतालों की गुणवत्ता जांच में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन को भी शामिल किया जाएगा। सभी संस्थानों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा तथा प्रत्येक अस्पताल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। बैठक में जिला गुणवत्ता एवं यकीन समिति की समीक्षा भी की गई। परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत महिला नसबंदी सेवा के लिए चार निजी चिकित्सकों को इंपैनल करने का निर्णय लिया गया।
मौके पर डीपीएम डॉ. मुनाजिम, डीपीसी विश्वजीत कुमार, डीक्यूएसी सुमन सिन्हा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।



