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किशनगंज : सदर अस्पताल में सिविल सर्जन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक, यक्ष्मा मुक्त कार्यक्रम पर हुई चर्चा, वर्ष 2021 में कुल 1483 रोगियों की हुई पहचान।

जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी एवं यक्ष्मा नियंत्रण डॉ देवेन्द्र कुमार ने बताया कि एमडीआर-टीबी होने पर सामान्य टीबी की कई दवाएं एक साथ प्रतिरोधी हो जाती हैं। टीबी की दवाओं का सही से कोर्स नहीं करने एवं बिना चिकित्सक की सलाह पर टीबी की दवाएं खाने से ही सामान्यतः एमडीआर-टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है।

  • निश्चय पोर्टल से मरीजों की जा रही निगरानी।
  • गृह भ्रमण के दौरान पहचान कर शीघ्र कराएं बलगम जांच।
  • वर्ष 2021 में कुल 1483 रोगियों की हुई पहचान।
  • एमडीआर-टीबी हो सकता है गंभीर, रहें सतर्क।
  • टीबी मरीजों के लिए काफी मददगार है “निक्षय पोषण योजना”

किशनगंज/धर्मेन्द्र सिंह, जिले को यक्ष्मा मुक्त बनाने के लिए सिविल सर्जन कार्यालय सभागार में बुधवार को एनटीईपी (नेशनल ट्यूबक्यूलोसिस एलिमेशन कार्यक्रम) के अंतर्गत टीबी संबंधित प्रोग्रेस रिपोर्ट, मरीजों का उपचार तथा कितने मरीजों को निश्चय पोषण योजना के तहत लाभ दिया गया, को लेकर सिविल सर्जन डॉ कौशल किशोर की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ किशोर ने कहा कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। टीबी उन्मूलन के लिए निर्धारित महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण स्वाभाविक रूप से आघात पहुंचा है। अब स्वास्थ्य विभाग ने टीबी उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग के द्वारा टीबी हारेगा देश जीतेगा अभियान को जन आंदोलन के रूप में चलाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों तक लोगों को इसके लिए जागरूक किया जा रहा और उन्हें बीमारी से बचाव की जानकारी दी जा रही है। बैठक में क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमुल होदा, एसीएमओ डॉ सुरेश प्रसाद, गैर संचारी रोग पदाधिकारी एवं यक्ष्मा नियंत्रण डॉ देवेन्द्र कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ मुनाजिम, जिला योजना समन्वयक विश्वजीत कुमार, तथा लैब टेक्निशियन, एसटीएस, एसटीएलएस सम्मिलित हुए। सिविल सर्जन डॉ किशोर ने कहा कि टीबी पर प्रभावी नियंत्रण और उन्मूलन के लिए सरकार ने एक नई योजना लागू की है। इसका उद्देश्य क्षय रोग से मुक्ति पाना है। नई योजना के तहत सारथी के तौर पर निश्चय पोर्टल बनाया गया है। इसके माध्यम से प्रशासनिक स्तर पर ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। पोर्टल के माध्यम से टीबी मरीजों और उनके इलाज से संबंधित सूचनाएं और इलाज से स्वास्थ्य में सुधार की जानकारियां दर्ज हो रही हैं। प्रतिदिन पोर्टल अपडेट किया जा रहा है। इसमें सुझाव और शिकायत को लेकर भी सुविधाएं दी गई हैं। समीक्षा बैठक में जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी एवं यक्ष्मा नियंत्रण डॉ देवेन्द्र कुमार ने बताया कि जिले में वर्ष 2021 में कुल 1483 यक्ष्मा रोगियों की पहचान की गई है। जिसमें मरीजों की पहचान 1365 सरकारी अस्पतालों में तथा 118 मरीजों की पहचान प्राइवेट अस्पतालों के द्वारा की गई है। जिसे मरीजों को निश्चय योजना का लाभ तथा उपचार के लिए सरकारी अस्पतालों में रेफर किया गया। जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी एवं यक्ष्मा नियंत्रण डॉ देवेन्द्र कुमार ने बताया कि एमडीआर-टीबी होने पर सामान्य टीबी की कई दवाएं एक साथ प्रतिरोधी हो जाती हैं। टीबी की दवाओं का सही से कोर्स नहीं करने एवं बिना चिकित्सक की सलाह पर टीबी की दवाएं खाने से ही सामान्यतः एमडीआर-टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है। सिविल सर्जन डॉ कौशल किशोर ने बताया कि टीबी मरीजों को इलाज के दौरान पोषण के लिए 500 रुपये प्रतिमाह दिए जाने वाली निक्षय पोषण योजना बड़ी मददगार साबित हुई है। नए मरीज मिलने के बाद उन्हें 500 रुपये प्रति माह सरकारी सहायता भी प्रदान की जा रही है। यह 500 रुपये पोषण युक्त भोजन के लिए दिया जा रहा है। टीबी मरीज को आठ महीने तक दवा चलती है। इस आठ महीने की अवधि तक प्रतिमाह पांच 500-500 रुपये दिए जाएंगे। अब तक जिले में 11 लाख से अधिक राशि योजना के तहत डी बी टी के माध्यम से राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जा चुकी है। वहीं टीबी मरीजों के नोटीफाइड करने पर निजी चिकित्सकों को 500 रुपये तथा उस मरीज को पूरी तरह से ठीक हो जाने के बाद भी निजी चिकित्सकों को 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। वहीं ट्रीटमेंट सपोर्टर को अगर कोई टीबी के मरीज छह माह में ठीक हो गया है तो उसे 1000 रुपये तथा एमडीआर के मरीज के ठीक होने पर 5000 रुपये की प्रोत्साहन दी जाती है। अगर कोई आम व्यक्ति भी किसी मरीज को सरकारी अस्पताल में लेकर आता और उस व्यक्ति में टीबी की पुष्टि होती तो लाने वाले व्यक्ति को भी 500 रुपये देने का प्रावधान है।

dharmendra singh

धर्मेन्द्र सिंह प्रिंट माध्यम में 17 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 10 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं।राजनीतिक, सामाजिक व अपराध की खबरों में विशेष रूचि है।

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