राजनीतिक साजिश का शिकार हुए IAS मिथलेश मिश्रा, लखीसराय DM पद से हटाकर GAD में किया डंप

चंदन सिंह राणा/बिहार की सत्ता की गलियारों में एक और ईमानदार अधिकारी राजनीतिक शतरंज की बलि चढ़ गया। लखीसराय के जिलाधिकारी IAS मिथलेश मिश्रा को साजिशन जिलाधिकारी पद से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) में भेज दिया गया है। और इस पूरी कवायद के पीछे दो बड़े नाम सामने आ रहे हैं — केंद्रीय मंत्री एवं मुंगेर सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा।
दो नेताओं की रंजिश में पिसा एक अधिकारी
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के बीच लखीसराय को लेकर राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई काफी समय से जारी है। विजय सिन्हा लखीसराय विधानसभा सीट से लगातार पाँचवीं बार विधायक हैं और इस जिले को अपना गढ़ मानते हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का भी इस इलाके में राजनीतिक प्रभाव है। इन दोनों दिग्गजों की आपसी खींचतान और अहंकार की टकराहट में डीएम मिथलेश मिश्रा बेकसूर होते हुए भी बलि के बकरे बन गए।
निष्पक्षता ही बनी दुश्मन
बताया जाता है कि डीएम मिथलेश मिश्रा अपने कार्यकाल में किसी भी राजनीतिक दबाव में आए बिना प्रशासनिक कार्य करते रहे। न ललन सिंह के खेमे के इशारे पर चले, न विजय सिन्हा के। उनकी यही निष्पक्षता दोनों नेताओं को नागवार गुजरी। जब दो शक्तिशाली नेताओं को एक ही अधिकारी अखरने लगे, तो नतीजा वही हुआ जो होना था — साजिश रचकर उन्हें मैदान से बाहर कर दिया गया।
GAD में भेजना सजा नहीं, बदला है
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि किसी सक्रिय और कुशल जिलाधिकारी को सामान्य प्रशासन विभाग में भेजना तकनीकी रूप से तबादला भले हो, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह उन्हें हाशिए पर धकेलने की कार्रवाई है। यह बिहार की पुरानी परंपरा है — जो अधिकारी नेताओं के इशारे पर नहीं नाचता, उसे “पार्क” कर दो।
विपक्ष ने उठाए सवाल
इस मामले पर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि जब सत्ता पक्ष के ही दो नेताओं की राजनीतिक रंजिश में एक IAS अधिकारी का करियर दांव पर लग जाए, तो बिहार में निष्पक्ष प्रशासन की उम्मीद कैसे की जाए? उन्होंने मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जाँच हो और मिथलेश मिश्रा को पुनः सम्मानजनक पद पर बहाल किया जाए।
बिहार में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी विजय सिन्हा के साथ तनातनी के बाद लखीसराय के SP अजय कुमार को हटाया जा चुका है। अब डीएम का नंबर आया। सवाल यह है कि राजनीतिक प्रतिशोध का यह सिलसिला कब थमेगा?

