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**दलित, गरीब एवं वंचित समाज की आवाज़ को दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक जवाब दिया जाएगा”* :-

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के संरक्षक एवं केंद्रीय मंत्री श्री जीतन राम मांझी के विरुद्ध लगातार हो रही कथित राजनीतिक साजिशों, पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों तथा बिहार में बढ़ती राजनीतिक असहिष्णुता पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता श्याम सुन्दर शरण ने कहा कि आदरणीय जीतन राम मांझी केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि दलित, गरीब, वंचित एवं उपेक्षित समाज के स्वाभिमान और संघर्ष के प्रतीक हैं। उन पर या उनके समर्थकों पर किसी भी प्रकार का हमला करोड़ों वंचित लोगों की आवाज़ को दबाने का प्रयास है, जिसे हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा।

प्रवक्ता श्याम सुन्दर ने आरोप लगाया कि राज्य में लगातार हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के कार्यकर्ताओं एवं नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। राजनीतिक विरोध के नाम पर हिंसा, धमकी और भय का वातावरण तैयार करने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन हिंसा और गुंडागर्दी को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

प्रवक्ता श्याम सुन्दर ने उदाहरण देते हुए कहा की जैसे मोहम्मद गजनी ने हिंदुस्तान पर आक्रमण के समय गायों को आगे रखकर हमला किया, ताकि हिन्दू अपने धर्म और आस्था के कारण उन पर वार न कर सकें और यदि करें तो उन्हें धर्म भ्रष्ट होने का भय रहे, उसी प्रकार जंगलराज के दौर में भी समाज को बांटने और बिहार का माहौल खराब करने के लिए दलितों को आगे कर राजनीति की गई। नक्सल आंदोलन के नाम पर सवर्णों की हत्याएं करवाई गईं, सवर्णों और दलितों के बीच वैमनस्य फैलाकर जमीनों पर कब्जा किया गया, वक्फ बोर्ड एवं कब्रिस्तान की जमीनों पर भी अतिक्रमण कराया गया। सबसे दुखद यह रहा कि उसी दौर में सबसे अधिक दलितों के नरसंहार हुए और अपने लोगों को नक्सली कमांडर बनाकर हिंसा, भय और अराजकता का माहौल खड़ा किया गया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा गया कि बिहार का दलित, गरीब एवं वंचित समाज अब पहले जैसा कमजोर और असंगठित नहीं है। समाज अब अपने सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूक है तथा किसी भी प्रकार के अन्याय का लोकतांत्रिक एवं राजनीतिक जवाब देने के लिए तैयार है। पार्टी ने कहा कि संविधान द्वारा मिले अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व से कई गंभीर सवाल भी पूछे गए। पार्टी नेताओं ने कहा कि बिहार में दलितों को सरकार द्वारा दी गई पर्चा भूमि पर अवैध कब्जों, दलित उत्पीड़न के मामलों, गरीबों एवं अल्पसंख्यकों की जमीनों पर अतिक्रमण तथा सामाजिक अन्याय से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। सामाजिक न्याय की राजनीति का दावा करने वाले दलों को इन विषयों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

प्रवक्ता ने तेजस्वी यादव से अपील करते हुए कहा कि वे अपने कार्यकर्ताओं को संयम एवं मर्यादा में रहने की सलाह दें तथा बिहार के राजनीतिक वातावरण को तनावपूर्ण बनाने से बचें। लोकतंत्र संवाद, विचार और संवैधानिक मूल्यों से चलता है, न कि धमकी और टकराव की राजनीति से।

हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) ने स्पष्ट किया कि पार्टी संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द में विश्वास रखती है। पार्टी का संघर्ष पूरी तरह लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहेगा। हालांकि यदि पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले और राजनीतिक प्रताड़ना का सिलसिला जारी रहा, तो राज्यव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन चलाया जाएगा और सड़क से सदन तक आवाज़ बुलंद की जाएगी।

अंत में पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि बिहार को जातीय तनाव और राजनीतिक हिंसा की दिशा में ले जाने का प्रयास राज्य और समाज दोनों के लिए घातक होगा। सभी राजनीतिक दलों को संयम, मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करना चाहिए।

 

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