किशनगंज : रेफरल घटा, गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता पर बढ़ा भरोसा
4,747 भर्ती मरीजों में 142 रेफर, अगस्त में आंकड़ा सिर्फ 5

किशनगंज, 19 अगस्त (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, जिले में नई रेफरल नीति का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई देने लगा है। अब गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थान भेजने से पहले यह आकलन किया जा रहा है कि उनका उपचार जिले में उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञ सेवाओं से संभव है या नहीं। इसका परिणाम है कि अगस्त में अब तक सदर अस्पताल से केवल पांच मरीजों को रेफर किया गया है।
सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अनवर हुसैन ने बताया कि अप्रैल 2026 से अब तक जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में 4,747 मरीज भर्ती हुए, जिनमें 142 मरीजों को ही उच्च चिकित्सा संस्थान भेजा गया। जुलाई में 30 मरीज रेफर किए गए थे, जबकि अगस्त के शुरुआती 18 दिनों में यह संख्या घटकर पांच रह गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11,785 भर्ती मरीजों में 544 को रेफर किया गया था।
नई व्यवस्था के तहत गंभीर मरीजों के लिए रेफरल कमेटी गठित की गई है। मरीज की प्राथमिक जांच, उपचार और स्थिति का आकलन करने के बाद निर्णय लिया जाता है कि उसे स्थानीय स्तर पर रखा जाए या उच्च संस्थान भेजा जाए।उद्देश्य अनावश्यक रेफरल रोकना और जरूरत पड़ने पर बिना विलंब उच्च चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
18 अगस्त को गंभीर स्थिति में सदर अस्पताल पहुंचे अजहरुल हक को चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद आईसीयू में भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। इसी तरह गंभीर एनीमिया से पीड़ित रौनक प्रवीन और शिखा जादा का भी सदर अस्पताल में सफल प्रसव कराया गया। दोनों का हीमोग्लोबिन क्रमशः 6.5 और 6 ग्राम प्रति डेसीलीटर था।
जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि उद्देश्य मरीजों को अनावश्यक रूप से बाहर भेजना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर जिले में गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि लक्ष्य केवल रेफरल घटाना नहीं, बल्कि सही मरीज को सही समय पर सही स्तर की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। उच्च स्तरीय उपचार की जरूरत होने पर रेफरल में किसी प्रकार की देरी नहीं की जाएगी।



