District Adminstrationकिशनगंजबिहारब्रेकिंग न्यूज़स्वास्थ्य

किशनगंज : जीवन के पहले 28 दिन नवजात के लिए सबसे अहम, नियमित निगरानी और परिवार की भूमिका जरूरी

किशनगंज, 27 जुलाई (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, जीवन के पहले 28 दिन नवजात शिशु के लिए सबसे संवेदनशील माने जाते हैं। इस दौरान संक्रमण, कम वजन, सांस लेने में परेशानी, शरीर का तापमान कम होना और स्तनपान से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग नवजात एवं धात्री की बेहतर देखभाल को प्राथमिकता देते हुए आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर पहुंचकर निगरानी और जागरूकता अभियान चला रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के साथ जन्म के बाद आशा कार्यकर्ता नियमित गृह भ्रमण कर नवजात की सांस, शरीर का तापमान, स्तनपान, वजन और सामान्य गतिविधियों की निगरानी करती हैं। साथ ही परिवार को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कराने, छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने, स्वच्छता बनाए रखने, नाभि की साफ-सफाई तथा नवजात को गर्म रखने की सलाह दी जाती है। यदि बच्चा दूध नहीं पी रहा हो, तेज सांस ले रहा हो, शरीर अत्यधिक गर्म या ठंडा हो, सुस्ती या दौरे जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की सलाह दी जाती है।

जिला सामुदायिक उत्प्रेरक सुमन सिन्हा ने कहा कि नवजात की देखभाल केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रसव के बाद मां को पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम और भावनात्मक सहयोग मिलने से वह बच्चे की बेहतर देखभाल कर सकती है। परिवार को भी नवजात को संक्रमण से बचाने के लिए स्वच्छता और सीमित संपर्क का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि जीवन के शुरुआती 28 दिनों में छोटी-सी लापरवाही भी बच्चे के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। उन्होंने परिवारों से अपील की कि आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह का पालन करें तथा किसी भी गंभीर लक्षण की स्थिति में तुरंत स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क करें।

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि समय पर चिकित्सकीय सहायता और नियमित निगरानी से नवजात में होने वाली कई गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिले में हाल ही में एक आशा कार्यकर्ता ने गृह भ्रमण के दौरान स्तनपान में परेशानी से जूझ रहे नवजात की पहचान कर समय पर स्वास्थ्य केंद्र भेजा, जिससे उपचार के बाद बच्चा स्वस्थ हो गया। उन्होंने कहा कि आशा की सतर्कता, परिवार का सहयोग और समय पर उपचार नवजात के सुरक्षित जीवन की मजबूत नींव है।

Related Articles

Back to top button