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किशनगंज : जीविका दीदियों के लिए आय का नया जरिया बना मछली पालन

किशनगंज,15मई(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, जिले में जीविका दीदियों के लिए मछली पालन अब आय का बेहतर माध्यम बनता जा रहा है। पारंपरिक रूप से मछली पालन से जुड़ी महिलाओं के साथ-साथ अन्य जीविका दीदियां भी अब इस व्यवसाय से जुड़ रही हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को कोचाधामन प्रखंड के दो तालाबों में जीविका दीदियों द्वारा मछली का बीज डाला गया। तालाबों में मुख्य रूप से रोहू, कतला और ग्रास कार्प प्रजाति की मछलियों का बीज डाला गया। जीविका की जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) अनुराधा चंद्रा ने बताया कि जिले में जीविका के माध्यम से कुल चार तालाबों में मछली पालन का कार्य किया जा रहा है। इनमें कोचाधामन प्रखंड में दो तथा दिघलबैंक और बहादुरगंज प्रखंड में एक-एक तालाब शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत संचालित इन तालाबों में जीविका दीदियों द्वारा मछली पालन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अब तक इन तालाबों से 2264 किलोग्राम मछली की बिक्री की जा चुकी है, जिससे लगभग तीन लाख तीस हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। चारों तालाबों में कुल 15 जीविका दीदियां कार्य कर रही हैं, जो जीविका मत्स्य उत्पादक समूह से जुड़ी हुई हैं। मछली पालन से संबंधित सभी गतिविधियों का संचालन इन्हीं समूहों के माध्यम से किया जा रहा है। कोचाधामन प्रखंड के राजधानी जीविका महिला उत्पादक समूह द्वारा संचालित तालाब से अब तक 510 किलोग्राम मछली का उत्पादन हुआ है, जिससे करीब 79 हजार रुपये की आमदनी हुई है। वहीं क्रांति मछली उत्पादक समूह द्वारा संचालित तालाब से 674 किलोग्राम मछली उत्पादन कर 94 हजार रुपये से अधिक का कारोबार किया गया है।

जीविका के युवा पेशेवर ऋषभ प्रसाद और प्रेम शंकर द्वारा दीदियों को तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। मछली पालन के साथ तालाब की मेड़ पर सब्जी की खेती भी की जा रही है, जिससे अतिरिक्त आय हो रही है।बताया गया कि तालाब की सफाई, बीज डालने, चारा व्यवस्था और मछली बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया में जीविका दीदियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। मत्स्य सखी द्वारा लेखा-जोखा का कार्य किया जा रहा है। उन्हें फिशरी रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर, मीठापुर पटना में प्रशिक्षण भी दिया गया है।

इस पहल से महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण होने के साथ-साथ उनकी तकनीकी क्षमता में भी वृद्धि हो रही है।

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