किशनगंज : नशे के खिलाफ किशनगंज में पुलिस का बड़ा अभियान, सात माह में 133 तस्कर गिरफ्तार

किशनगंज, 11 अगस्त (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, नेपाल, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की सीमाओं से सटा किशनगंज जिला लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। लेकिन जनवरी 2026 में पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के पदभार संभालने के बाद जिले में नशे के खिलाफ अभियान को नई दिशा मिली है। पुलिस की कार्रवाई और जनसहयोग से यह अभियान अब जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
एसपी संतोष कुमार ने नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए पारंपरिक पुलिसिंग से अलग रणनीति अपनाई।उन्होंने अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर आम लोगों से नशा तस्करी से जुड़ी सूचनाएं सीधे पुलिस तक पहुंचाने की अपील की। साथ ही गांव-गांव जाकर लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया। इसका असर यह हुआ कि स्थानीय लोग तस्करी की गतिविधियों की जानकारी पुलिस को देने लगे और कई मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव हुई।
नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए जिले में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का गठन किया गया है। टीम ने सीमावर्ती इलाकों में तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) के साथ मिलकर कई बड़ी कार्रवाइयां की हैं।
पुलिस के अनुसार पिछले सात महीनों में 133 तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इस दौरान 5.14 किलोग्राम स्मैक, 3.63 किलोग्राम ब्राउन शुगर, 2.30 किलोग्राम हेरोइन, 430 किलोग्राम से अधिक गांजा और 50 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद किए गए हैं।
फरवरी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के किशनगंज दौरे के दौरान नशे के कारोबार पर सख्ती के निर्देश के बाद अभियान और तेज हुआ। पुलिस अब असम और पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ समन्वय कर बड़े तस्करी नेटवर्क और सप्लाई चेन तक पहुंचने में जुटी है।
पुलिस आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार व तस्करी से संबंधित 70 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पुलिस का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अभियान लगातार जारी रहेगा।



