जमाबंदी शुद्धिकरण में तेजी लाएं, सरकारी भूमि का सत्यापन प्राथमिकता से करें
त्रिलोकी नाथ प्रसाद /सरकारी भूमि के सत्यापन में 5 एकड़ से अधिक के प्लॉट को दें प्राथमिकता, जाली दस्तावेज पर कार्रवाई तेज करने का निर्देश
पटना : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव श्री जय सिंह ने राजस्व कार्यों में तेजी लाने के लिए सख्त रुख अपनाते हुए अंचल अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन का निर्देश दिया है। गुरुवार को राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, शास्त्रीनगर, पटना में बेगूसराय, मधुबनी और जमुई के सभी अंचल अधिकारियों के साथ समीक्षात्मक बैठक में उन्होंने जमाबंदी शुद्धिकरण, सरकारी भूमि की पहचान, जमाबंदी नामांतरण सहित विभिन्न राजस्व सेवाओं की प्रगति की समीक्षा की।
सचिव श्री जय सिंह ने कहा कि जमाबंदी में त्रुटि आम नागरिकों के लिए गंभीर समस्या बनती है। इसलिए मौजा-वार विशेष अभियान चलाकर सभी जमाबंदियों का शुद्धिकरण सुनिश्चित करें। किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक लंबित रखने की प्रवृत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।
सरकारी भूमि के भौतिक सत्यापन की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि 5 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली सरकारी भूमि से सत्यापन कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए। सरकारी प्लॉट से संबंधित जमाबंदियों की भी जांच कर उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। लॉक की गई जमाबंदियों को नियमानुसार अनलॉक करने की कार्रवाई में भी तेजी लाने का निर्देश दिया गया।
बैठक में भू-अभिलेख पोर्टल पर प्राप्त अनुरोधों के विरुद्ध स्कैन दस्तावेजों के अपलोड तथा निबंधन से पूर्व अभिलेखों के सत्यापन की स्थिति की समीक्षा की गई। सचिव ने राजस्व महाअभियान के तहत प्राप्त आवेदनों का सिर्फ संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता के साथ निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा।
मृत रैयतों की जमाबंदी के मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तराधिकार एवं बंटवारा नामांतरण की कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि मृत रैयतों की जमाबंदी वर्षों तक लंबित रखना व्यवस्था की गंभीर कमी है। ऐसे मामलों को अभियान चलाकर निष्पादित करें।
दाखिल–खारिज आवेदनों में गलत प्रश्नावली भरने पर उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ नोटिस निर्गत करने का निर्देश दिया। जाली अथवा कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने के मामलों की भी समीक्षा के क्रम में सचिव ने ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई और दर्ज प्राथमिकी की स्थिति की लगातार निगरानी करने को कहा।
उन्होंने कर्मचारियों की के.सी. डायरी और मोबाइल ऐप के माध्यम से के.सी. उपस्थिति दर्ज करने की स्थिति की भी समीक्षा की। विवादित भूमि की मापी से संबंधित फीडबैक को गंभीरता से लेने और मापी कार्य में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
सचिव ने स्पष्ट कहा कि राजस्व सेवाओं में देरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। इसलिए सभी अंचल अधिकारी अपने स्तर पर नियमित निगरानी करें और प्रत्येक लंबित कार्य का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करें।
बैठक में सचिव श्रीमती सीमा त्रिपाठी, भू-अर्जन निदेशालय के निदेशक श्री कमलेश कुमार, सहायक निदेशक सह अपर सचिव श्री आजीव वत्सराज, अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल, उप निदेशक श्रीमती मोना झा, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री नवाजिश अख्तर, श्री अनुपम प्रकाश, उप सचिव श्री अविनाश कुमार, सहायक निदेशक-सह-जनसंपर्क पदाधिकारी सुश्री जूही कुमारी, आईटी मैनेजर श्री आनंद शंकर, प्रशाखा पदाधिकारी श्री राजीव शंकर, श्री दीनदयाल राम, श्री दिवाकर सहित तीनों जिलों के सभी अंचल अधिकारी उपस्थित थे।



