ताजा खबर

*बिहार की गौरवशाली विरासत, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को विश्व पटल पर पहुंचाना हम सभी का दायित्व : डॉ. प्रेम कुमार*

*बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय आश्रम में बिहार महोत्सव-2026 के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए बिहार विधान सभा अध्यक्ष*

 

*बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय आश्रम में बिहार महोत्सव-2026 के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए बिहार विधान सभा अध्यक्ष*

बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय आश्रम में आयोजित बिहार महोत्सव-2026 के उद्घाटन कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी, माननीय प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय सरावगी जी एवं माननीय मंत्री श्री जमा खान जी के साथ सहभागिता की।

इस अवसर पर उपस्थित बिहारवासियों एवं गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए अत्यंत गौरव, आत्मसम्मान और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को स्मरण करने का अवसर है। बिहार केवल एक भौगोलिक प्रदेश नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान, दर्शन और लोकतांत्रिक मूल्यों की पावन भूमि है। यह वही धरती है, जिसने विश्व को ज्ञान का प्रकाश दिया, सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया तथा मानवता को नई दिशा प्रदान की।

उन्होंने कहा कि बिहार का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही गौरवशाली भी है। प्राचीन काल में पाटलिपुत्र विश्व की महानतम राजधानियों में शामिल रहा है। यही वह भूमि है, जहां महान सम्राट अशोक ने शासन किया और युद्ध के पश्चात शांति एवं मानवता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया।

डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार की धरती भगवान गौतम बुद्ध की ज्ञानस्थली है। यहीं से बौद्ध धर्म का संदेश विश्व के अनेक देशों तक पहुंचा। भगवान महावीर की तपोभूमि भी बिहार रही, जिन्होंने मानव समाज को अहिंसा, सत्य और करुणा का मार्ग दिखाया।

उन्होंने बिहार की ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस धरती ने महान गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री आर्यभट्ट को जन्म दिया, जिन्होंने विश्व को नई वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान की। चाणक्य की कूटनीति और अर्थशास्त्र आज भी शासन एवं प्रशासन के क्षेत्र में प्रेरणास्रोत हैं। नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालय प्राचीन काल में ज्ञान के प्रमुख केंद्र रहे, जहां देश-विदेश से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे।

बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बिहार को लोकतंत्र की जननी होने का गौरव भी प्राप्त है। वैशाली की पवित्र भूमि विश्व के प्राचीनतम गणराज्यों में से एक रही है। यह प्रत्येक बिहारी के लिए गर्व का विषय है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की जड़ें हमारी इस पावन धरती में हजारों वर्ष पूर्व ही स्थापित हो चुकी थीं।

उन्होंने कहा कि बिहार की पहचान केवल उसके गौरवशाली इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जीवंत कला, संस्कृति, लोक परंपराएं और सामाजिक समरसता भी इसकी विशेष पहचान हैं। मधुबनी पेंटिंग ने बिहार की लोककला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका जैसी लोकभाषाएं बिहार की सांस्कृतिक विविधता एवं समृद्धि की प्रतीक हैं।

डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि छठ महापर्व बिहार की सांस्कृतिक चेतना और प्रकृति के प्रति हमारी आस्था का अनुपम उदाहरण है। सूर्योपासना का यह महान पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्वच्छता, अनुशासन, समानता और प्रकृति के साथ मानव के आत्मीय संबंध का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि बिहार की लोकसंस्कृति में लोकगीतों की मधुरता, लोकनृत्यों की ऊर्जा और हमारी परंपराओं में सामाजिक एकता की अद्भुत शक्ति निहित है। भिखारी ठाकुर की लोकनाट्य परंपरा, महाकवि विद्यापति की रचनाएं, सोहर, कजरी, चैता और अन्य लोकगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत को आज भी जीवंत बनाए हुए हैं।

डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि आज बिहार तेजी से विकास की नई यात्रा पर अग्रसर है। हमारा गौरवशाली अतीत हमें प्रेरणा देता है और वर्तमान एक विकसित एवं आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण के लिए संकल्पित करता है। हमारा दायित्व है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को बिहार के गौरवशाली इतिहास, महापुरुषों, कला और संस्कृति से परिचित कराएं। आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों को कभी नहीं भूलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बिहार के पास गौरवशाली इतिहास, अपार प्रतिभा, समृद्ध संस्कृति और सबसे बढ़कर मेहनतकश एवं प्रतिभाशाली युवा शक्ति है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि बिहार की यही युवा शक्ति राज्य को विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

अंत में बिहार विधान सभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने बिहार महोत्सव-2026 के सफल आयोजन के लिए आयोजकों एवं उपस्थित सभी लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रह रहे बिहारवासियों को अपनी मिट्टी, संस्कृति और गौरवशाली विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button