
त्रिलोकी नाथ प्रसाद/इस बैठक में लोक लेखा समिति, सरकारी उपक्रमों से संबंधित समिति, प्राक्कलन समिति, शून्यकाल समिति, याचिका समिति, निवेदन समिति, कारा सुधार समिति, गैर सरकारी संकल्प समिति, बिहार विरासत विकास समिति सहित अन्य समितियों एवं शाखाओं की कार्यप्रणाली की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में सर्वप्रथम वित्तीय समितियों — लोक लेखा, सरकारी उपक्रम एवं प्राक्कलन समिति के कार्य की समीक्षा हुई। समीक्षा के दौरान पाया गया कि लोक लेखा समिति एवं सरकारी उपक्रमों से संबंधित समिति में कई मामले कई वर्षों से लंबित हैं। कुल 23 विभागों से संबंधित कंडिकाएं लोक लेखा समिति में लंबित हैं। माननीय अध्यक्ष ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे वित्त विभाग तथा महालेखाकार कार्यालय के बीच समन्वय स्थापित कर लंबित कंडिकाओं को शीघ्र निष्पादित कराएं। साथ ही, विभागों की समीक्षा बैठक बुलाकर लंबित कंडिकाओं को शीघ्र निष्पादित कराएं। माननीय अध्यक्ष ने कहा कि हमें अपनी कार्य प्रणाली को इस प्रकार सुदृढ़ करना है कि एक भी कंडिका लंबित ना रहे। शून्यकाल की समीक्षा में पाया गया कि विभाग द्वारा शून्यकाल का जवाब उपलब्ध कराया जा रहा है। जिन विभागों से जवाब प्राप्त नहीं हुए हैं, उन्हें स्मार पत्र भेजे जा रहे हैं। माननीय अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि जिन विभागों से उत्तर प्राप्त नहीं हो रहे हैं, उनके साथ समीक्षा बैठक कर जवाब मांगे। इसी तरह याचिका, निवेदन, ध्यानाकर्षण एवं गैर सरकारी संकल्प की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि विभाग से जवाब नहीं प्राप्त होने की स्थिति में स्मार पत्र भेजें। तीन स्मार पत्र भेजने के बाद भी यदि जवाब नहीं आता है तो मुख्य सचिव को पत्र भेजें। अपनी तरफ से कार्य करने में कोई कोताही नहीं बरतें।
इस बैठक में अल्पसंख्यक कल्याण समिति, कारा सुधार समिति, पुस्तकालय समिति, कृषि उद्योग विकास समिति एवं आवास शाखा की भी समीक्षा हुई। आवास शाखा की समीक्षा करते हुए माननीय अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि जिन माननीय सदस्यों ने अभी तक आवंटित आवास का प्रभार ग्रहण नहीं किया है, उन्हें सभी औपचारिकताएं पूरी करते हुए आवंटित आवास का प्रभार शीघ्र ग्रहण कराएं।

