
मरीज से दुर्व्यवहार के मामले में कार्रवाई, नए OPD-IPD मरीजों और नई इलेक्टिव सर्जरी पर रोक
रांची, 12 सितंबर 2026। मरीज से दुर्व्यवहार के मामले में झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने रांची के रिंग रोड स्थित ट्यूलिप हॉस्पिटल के खिलाफ बड़ी नियामकीय कार्रवाई की है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के निर्देश के बाद रांची सिविल सर्जन ने अस्पताल के पंजीकरण/लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एवं रेगुलेशन) अधिनियम, 2010 और झारखंड क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स नियम, 2013 के तहत की गई है। निलंबन विस्तृत जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।
निलंबन के दौरान ट्यूलिप हॉस्पिटल में नए मरीजों से जुड़ी कई सेवाओं पर रोक रहेगी। इनमें:
– नए OPD मरीजों का पंजीकरण एवं इलाज
– नए IPD मरीजों की भर्ती
– नई इलेक्टिव सर्जरी
– अन्य नई क्लिनिकल सेवाएं शामिल हैं। अस्पताल प्रबंधन को आदेश का तत्काल और कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, अस्पताल में पहले से भर्ती मरीजों के इलाज को प्रभावित नहीं किया जाएगा। प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि भर्ती मरीजों को आवश्यक और उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती रहे। जरूरत पड़ने पर संबंधित अस्पतालों और सक्षम प्राधिकारियों के समन्वय से मरीजों को सुरक्षित रूप से दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने 10 सितंबर 2026 को हुई घटना से जुड़े सभी रिकॉर्ड और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। इसमें मरीजों की केस शीट, OPD/IPD रजिस्टर, उपचार संबंधी दस्तावेज, सहमति पत्र, जांच रिपोर्ट, ड्यूटी रोस्टर, उपस्थिति रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा शामिल हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रिकॉर्ड में बदलाव करने, उसे नष्ट करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की स्थिति में नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले की विस्तृत जांच सक्षम प्राधिकारी या गठित समिति द्वारा की जाएगी। अस्पताल प्रबंधन को जांच में पूर्ण सहयोग करने और मांगे गए सभी दस्तावेज एवं जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी केवल इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि मरीजों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करना भी है। उन्होंने कहा, “अस्पताल इलाज के लिए है, गुंडागर्दी के लिए नहीं। मरीज बीमारी और परेशानी की हालत में अस्पताल पहुंचता है। उसके साथ दबंगई, मारपीट या किसी भी तरह का अमानवीय व्यवहार बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाएगा।” मंत्री ने कहा कि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी सम्मानजनक, सुरक्षित और बेहतर इलाज मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई अस्पताल, संचालक या व्यक्ति नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों को चेतावनी देते हुए कहा कि मरीज की मृत्यु के बाद केवल बकाया राशि की वसूली के दबाव में शव को रोकना स्वीकार्य नहीं है। मृतक और उसके परिजनों की गरिमा तथा मानवीय संवेदनाओं का सम्मान करना अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अधिकांश निजी अस्पताल नियमों और मानवीय मूल्यों का पालन कर रहे हैं, लेकिन जहां भी मरीज या उनके परिजनों के साथ प्रताड़ना, दुर्व्यवहार अथवा सरकारी निर्देशों की अवहेलना का मामला सामने आएगा, वहां सरकार नियमानुसार कार्रवाई करेगी।
डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि ट्यूलिप हॉस्पिटल में हुई घटना उनके संज्ञान में आते ही उन्होंने बिना देरी किए रांची सिविल सर्जन को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल के पंजीकरण/लाइसेंस का अंतरिम निलंबन यह स्पष्ट संदेश है कि झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मनमानी नहीं चलेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार निजी क्षेत्र के अस्पतालों के खिलाफ नहीं है। नियमों का पालन करते हुए मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने वाले अस्पतालों के साथ सरकार सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाने, नियमों की अनदेखी करने, मरीजों या उनके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करने अथवा स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। मंत्री ने कहा, “झारखंड में स्वास्थ्य सेवा को जनसेवा का माध्यम बनाया जाएगा, व्यापारिक मनमानी का नहीं। जनता के स्वास्थ्य और सम्मान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा



