किशनगंज : मेले की आड़ में सट्टेबाज़ी का गंदा खेल, मनोरंजन के नाम पर जुए का नंगा नाच

किशनगंज, 05 जुलाई (के.स.)। सीमांचल के किशनगंज जिले में सांस्कृतिक धरोहरों और ग्रामीण मेलों की आड़ में अवैध धंधों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है। ताजा मामला बहादुरगंज थाना क्षेत्र के लेल्हिया हाट के समीप का है, जहां जुलाई माह में आयोजित एक मेले में मनोरंजन और झूले तो सिर्फ दिखावा साबित हुए, जबकि इसकी आड़ में खुलेआम प्रतिबंधित जुए का बड़ा खेल खेला गया। लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो इस तथाकथित मेले का मुख्य आकर्षण कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम या बच्चों के झूले नहीं, बल्कि सट्टेबाज़ी और जुए के काउंटर थे। इस खुलासे के बाद अब सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर उंगलियां उठने लगी हैं!
मनोरंजन का मुखौटा, जुए का सिंडिकेट :
नियमों के मुताबिक, किसी भी ग्रामीण या शहरी क्षेत्र में मेले के आयोजन का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बच्चों का मनोरंजन होता है। लेकिन लेल्हिया हाट के समीप जो कुछ भी देखा गया, वह चौंकाने वाला था।
दिखावे के झूले, असली खेल पीछे :
पड़ताल में सामने आया कि मेले में परिवार और बच्चों के लिए नाम मात्र के साधन थे। मुख्य भीड़ जुए के काउंटरों पर थी, जहां भोले-भाले ग्रामीणों और युवाओं की जेबें साफ की जा रही थीं।
आरोप है कि बिना किसी रसूख “ऊपरी इतने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक स्थान पर जुआ संचालित करना मुमकिन ही नहीं है।
“मेला हमारी संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन यहाँ मनोरंजन के नाम पर बर्बादी का बाज़ार सजाया गया। हमारे क्षेत्र के युवा और दैनिक मजदूर इस सट्टेबाज़ी के जाल में फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं।
इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल हवा में तैर रहे हैं। और निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में।



