किशनगंज में बढ़ा सुरक्षित मातृत्व का भरोसा, संस्थागत प्रसव 67.1% पहुंचा

किशनगंज, 04 सितंबर (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, जिले में सुरक्षित मातृत्व को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) के अनुसार किशनगंज में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत एनएफएचएस-5 के 54.6 प्रतिशत से बढ़कर 67.1 प्रतिशत हो गया है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव का आंकड़ा भी 41.5 से बढ़कर 49.6 प्रतिशत पहुंच गया है।
सदर अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच अस्पताल में कुल 7067 सामान्य प्रसव कराए गए, जबकि 167 महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया। जटिल प्रसव के मामलों में चौबीसों घंटे उपलब्ध आपातकालीन सेवा महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है। अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, ब्लड बैंक, एसएनसीयू और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एनएफएचएस-6 में गर्भावस्था की पहली तिमाही में प्रसवपूर्व जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 37.6 से बढ़कर 62.2 हो गया। वहीं किसी भी प्रकार की प्रसवपूर्व जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 59.2 से बढ़कर 92.7 प्रतिशत दर्ज किया गया। कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में प्रसव कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत भी 64.9 से बढ़कर 70.1 प्रतिशत हुआ है।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। संस्थागत प्रसव में वृद्धि यह दर्शाती है कि लोगों का सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर भरोसा बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य जिले के प्रत्येक गांव और प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर जांच, सुरक्षित प्रसव और आवश्यक चिकित्सा सुविधा पहुंचाना है।
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनवर हुसैन ने बताया कि लेबर रूम लक्ष्य प्रमाणित है और प्रसव सेवाओं की गुणवत्ता तथा मातृ-नवजात सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शबनम यास्मीन ने कहा कि सिजेरियन ऑपरेशन केवल चिकित्सकीय आवश्यकता होने पर किया जाता है और जटिल मामलों में समय पर निर्णय मां और नवजात की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।



