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आयुर्वेद में झारखंड को देश का हब बनाएंगे, ₹900 करोड़ की लागत से खुलेगा आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज: डॉ. इरफान अंसारी

रांची, 20 सितंबर 2026। झारखंड को आयुर्वेद और आयुष के क्षेत्र में आगे ले जाने की दिशा में राज्य सरकार काम कर रही है। स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि झारखंड में करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी चल रही है। इसके लिए जमीन भी चिन्हित की जा चुकी है। डोरंडा स्थित वन विभाग सभागार में झारखंड प्रदेश आयुर्वेद सम्मेलन के प्रथम स्थापना दिवस और आयुर्वेद दिवस के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. इरफान अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मंत्री ने कहा कि झारखंड में जंगल, औषधीय पौधे और प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है। हमारे राज्य में आयुर्वेद के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। जरूरत है कि इन संसाधनों का सही तरीके से उपयोग किया जाए।उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि झारखंड को आयुर्वेद के क्षेत्र में देश का एक बड़ा केंद्र बनाया जाए, जहां दूसरे राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी लोग इलाज कराने के लिए आएं।

केरल से भी बेहतर व्यवस्था बनाने का लक्ष्य

डॉ. अंसारी ने कहा कि केरल ने आयुर्वेद के क्षेत्र में काफी अच्छा काम किया है और उसकी देशभर में पहचान है। झारखंड में भी इससे बेहतर काम करने की पूरी संभावना है।उन्होंने कहा कि झारखंड में प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा की भी समृद्ध परंपरा है। सरकार सही नीति, अच्छे संस्थान, बेहतर प्रशिक्षण और शोध के माध्यम से आयुर्वेद को आगे बढ़ाए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल किसी एक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देना नहीं है। एलोपैथी हो, आयुर्वेद हो, होम्योपैथी हो या दूसरी आयुष पद्धतियां, सभी का उद्देश्य लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देना है। उन्होंने कहा कि आयुष के क्षेत्र में केवल भवन बनाने से काम नहीं चलेगा। अच्छे डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, विशेषज्ञ, अस्पताल, आधुनिक जांच की सुविधा और शोध की भी जरूरत है। डॉ. अंसारी ने कहा कि आने वाले समय में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ आयुर्वेद में शोध पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि लोगों को अच्छी और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। मंत्री ने कहा कि झारखंड में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की जरूरत को लेकर केंद्र सरकार के सामने भी मांग रखी गई है। उन्होंने कहा कि झारखंड के पास प्राकृतिक संसाधनों की बड़ी ताकत है और इसका लाभ राज्य के लोगों को भी मिलना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार के सहयोग से आयुर्वेद के क्षेत्र में झारखंड के लिए जल्द महत्वपूर्ण काम होगा। डॉ. अंसारी ने कहा कि आयुर्वेद हमारी हजारों साल पुरानी चिकित्सा पद्धति है। इसे बचाने के साथ-साथ आधुनिक शोध और तकनीक से जोड़ना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास रहेगा कि आयुष की सुविधाएं गांवों और दूर-दराज के इलाकों तक भी पहुंचे।कार्यक्रम के दौरान डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि उनकी तबीयत खराब थी और उन्हें तेज बुखार भी था, लेकिन आयोजकों और वरिष्ठ लोगों के सम्मान में वे कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने कहा कि झारखंड में पहली बार इतने बड़े स्तर पर आयुर्वेद सम्मेलन का आयोजन होना अच्छी शुरुआत है। आने वाले समय में इसे और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, अस्पताल, डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने, शोध संस्थान, औषधीय पौधों के संरक्षण और आयुष सेवाओं के विस्तार पर सरकार काम करेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में झारखंड आयुर्वेद और आयुष के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा। कार्यक्रम में XISS रांची के डॉ. आनंद कुमार, सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज पटना के डॉ. प्रभात कुमार द्विवेदी, जगन्नाथ द्विवेदी, उमेश शर्मा, सुदामा प्रसाद, सुबोध दुबे, डॉ. उमाशंकर शर्मा, दिनेश कुमार यादव सहित बड़ी संख्या में आयुष एवं आयुर्वेद से जुड़े डॉक्टर, विशेषज्ञ और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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