किशनगंज : नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को 10 वर्ष की सुनाई गई सजा
अनन्य विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम दीप चंद पाण्डेय की अदालत ने सुनाई सजा
किशनगंज, 19 सितंबर (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, अनन्य विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम दीप चंद पाण्डेय की अदालत ने दुष्कर्म के एक मामले में शनिवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के एक संवेदनशील मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी राजीव दास निवासी गुवाबारी, पोठिया को दोषी पाते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। बाद संख्या 8/2018 व महिला थाना कांड संख्या 20/2016 के तहत सजा सुनाई गई।
इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना राशि नहीं देने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो अधिनियम मनीष कुमार साह ने अदालत ने सजा की बिंदु पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने सरकार की ओर से पीड़िता को 5 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का भी आदेश पारित किया है।
मामले में सरकार की ओर से पैरवी करने वाले विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो एक्ट) मनीष कुमार साह ने बताया कि न्यायालय ने पीड़िता की कम उम्र और मानसिक प्रताड़ना को ध्यान में रखते हुए सरकार के कोष से पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का निर्णय सुनाया है।
गौर करे कि यह पूरा मामला 14 मार्च 2016 का है, जब नाबालिग पीड़िता अपने घर में अकेली थी और शाम के वक्त खाना बना रही थी। इसी दौरान आरोपी राजीव दास जबरन घर में घुस गया। उसने नाबालिग पीड़िता का मुंह दबाकर उसे जान से मारने की धमकी दी और घर के पीछे ले जाकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था।
इस बाबत किशनगंज महिला थाना में कांड संख्या 20/2016 दर्ज कराई गई थी। विशेष लोक अभियोजक मनीष कुमार साह ने बताया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाहों को न्यायालय के समक्ष परीक्षित कराया गया। गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने धारा 376 आईपीसी एवं धारा 4 पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी को 10 साल की कड़ी सजा मुकर्रर की। इस फैसले के बाद कोर्ट परिसर में पीड़िता के परिजनों ने न्याय व्यवस्था के प्रति आभार जताया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के त्वरित और सख्त फैसलों से समाज में अपराधियों के बीच खौफ पैदा होगा और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर लगाम लगेगी।



