किसानों की जरूरतों के अनुरूप बनेगी कार्ययोजना, जलछाजन एवं सिंचाई योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश

जलछाजन विकास योजना की समीक्षा में कृषि मंत्री सख्त, किसानों तक समय पर लाभ पहुंचाने पर जोर
19.85 करोड़ रुपये की राशि के प्रभावी उपयोग का निर्देश, सिंचाई और जल संरक्षण को मिलेगी नई गति
WDC-PMKSY 3.0 की तैयारी शुरू, कृषि मंत्री बोले—किसानों के हित में विकास कार्यों में नहीं आने दी जाएगी कोई बाधा
समय पूर्व बीज वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए- विजय कुमार सिन्हा
त्रिलोकी नाथ प्रसाद/बिहार के माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा एवं कृषि विभाग के प्रधान सचिव द्वारा आज जलछाजन विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC-PMKSY 2.0) की प्रगति एवं क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक में योजना के प्रभावी कार्यान्वयन, उपलब्ध राशि के समयबद्ध उपयोग तथा किसानों को अधिकाधिक लाभ पहुंचाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में माननीय कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों की आवश्यकताओं एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजनाएं तैयार की जाएं तथा सिंचाई एवं जल संरक्षण से संबंधित योजनाओं का लाभ समय पर किसानों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने विकास आयुक्त, बिहार की अध्यक्षता में अन्य विभागों, विशेषकर लघु जल संसाधन एवं ग्रामीण विकास विभाग से समन्वय स्थापित कर किसानों के हित से जुड़ी योजनाओं को शीघ्र स्वीकृति दिलाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।
माननीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा जलछाजन विकास के माध्यम से कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि बीज वितरण से संबंधित सभी कार्य समय पर पूर्ण कर लिए जाएं ताकि किसानों को बुआई के मौसम में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े और फसलों की समय पर बुआई सुनिश्चित हो सके।
बैठक में निदेशक, भूमि संरक्षण-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार जलछाजन विकास समिति द्वारा योजना की प्रगति की जानकारी दी गई। बताया गया कि जलछाजन विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC-PMKSY 2.0) वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक स्वीकृत थी, जिसे भारत सरकार द्वारा सितंबर 2026 तक विस्तारित किया गया है। साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा 19.85 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है।
अधिकारियों ने अवगत कराया कि उक्त राशि के उपयोग हेतु वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना को स्टेट लेवल सैंक्शनिंग कमेटी (SLSC) से स्वीकृति प्राप्त होना आवश्यक है। इस संबंध में 7 मई 2026 को विकास आयुक्त की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई थी, किंतु स्वीकृति संबंधी निर्णय अभी लंबित है। स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात ही योजना के अंतर्गत विभिन्न कार्यों का निष्पादन एवं राशि का व्यय संभव हो सकेगा।
बैठक में यह भी बताया गया कि भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि के शीघ्र उपयोग पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि योजना की राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय प्रगति प्रभावित न हो। इस पर माननीय कृषि मंत्री एवं प्रधान सचिव ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने तथा स्वीकृति प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
माननीय कृषि मंत्री ने कहा कि जलछाजन विकास योजना कृषि विभाग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जो जल एवं भूमि संरक्षण, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक संसाधनों के विकास, आजीविका संवर्द्धन और क्षमता निर्माण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से जलछाजन क्षेत्रों में कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य में वर्तमान में 72 कृषि अभियंता, 38 सहायक निदेशक (शष्य) तथा 46 प्रखंड भूमि संरक्षण पदाधिकारी कार्यरत हैं। इन पदाधिकारियों द्वारा भूमि एवं जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण, उत्पादन प्रणाली के सुदृढ़ीकरण तथा किसानों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है।
बैठक के अंत में माननीय कृषि मंत्री ने जलछाजन विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC-PMKSY 3.0) की स्वीकृति एवं भविष्य के कार्यान्वयन की तैयारियों को भी प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार किसानों और गरीबों के कल्याण के लिए पूरी तरह समर्पित है। किसानों की समृद्धि, कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है तथा विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

