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बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने मानवीय संवेदना, साहस और अधिकारों के प्रतीक ‘विश्व शरणार्थी दिवस’ पर कहा कि हम उन लाखों लोगों के अदम्य साहस और संघर्ष को नमन करते हैं,

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/ जिन्हें हिंसा, उत्पीड़न और संघर्ष के कारण अपना देश और घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा समर्पित यह विशेष दिन शरणार्थियों के प्रति सहानुभूति रखने और उनके अधिकारों की रक्षा और वैश्विक समाज का सामूहिक दायित्व निभाने का अवसर प्रदान करता है। भारत की सनातन संस्कृति ने हमेशा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत को जिया है और संकट के समय मानवता को आश्रय दिया है। यह दिवस हमें ऐसे शांतिपूर्ण, सुरक्षित और न्यायपूर्ण विश्व के निर्माण के संकल्प की याद दिलाता हैं, जहाँ किसी भी निर्दोष को अपना घर न खोना पड़े और हर मनुष्य को सम्मान व सुरक्षा के साथ जीने का अधिकार मिले।

 

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