राज्य

घातक हो सकते हैं नीरवता और शांति के ये संकेत।…

निशिकांत ठाकुर/जब कुछ अप्रत्याशित या फिर किसी प्रकार की अनहोनी होनेवाली होती है, तो पूरा वातावरण नीरव और शांत हो जाता है। सामान्य लोग इसे भांप नहीं पाते, लेकिन परिपक्व अनुभवी लोग इस नीरवता और शांति का पूर्वानुमान लगा लेते हैं। जो इस नीरवता को समझ नहीं पाते और अपनी अकड़ में रह जाते हैं, उनका हश्र पड़ोसी देश नेपाल की तरह हो जाता है। नेपाल में हालिया सत्ता परिवर्तन व्यापक जन-आंदोलनों (विशेष रूप से युवाओं के प्रदर्शनों) के कारण सितंबर 2025 में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे और उसके बाद हुए चुनावों से हुआ। नेपाल के हालिया राजनीतिक बदलाव के मुख्य कारणों की चर्चा करें, तो भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता के ख़िलाफ़ ‘जेन ज़ेड’ के नेतृत्व में पूरे देश में हिंसक और व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। स्थिति बिगड़ने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई और सेना ने स्थिति को नियंत्रित किया। राजनीतिक संकट के बीच 5 मार्च, 2026 को संसदीय चुनाव हुए। इस चुनाव में ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ को बहुत बड़ी जीत मिली। चुनावों के ऐतिहासिक जनादेश के बाद काठमांडू के लोकप्रिय मेयर और युवा नेता बालेंद्र शाह (बालेन) के नेतृत्व में 27 मार्च, 2026 को नई सरकार का गठन हुआ। यह पहली बार है जब नेपाल में बिना किसी पुरानी गठबंधन सरकार के युवाओं की सीधी भागीदारी वाली सरकार बनी है।
आज जो स्थिति देश की बन गई है, उसमें भी यह लक्षण दिखने लगा है कि हो न हो? देश में निकट भविष्य कुछ होने वाला है। राजनीतिज्ञ और सामान्य जनता भी इस नीरवता और शांति के भावी परिणाम को भांपने लगे हैं, लेकिन किसी में, चाहे राजनीतिज्ञ हों, समाजसेवी हों, पत्रकार हों, इतनी हिम्मत शेष नहीं रही है कि वह सत्ता के आमने सामने होकर उसकी निष्पक्षता पर अंगुली उठाए। सब अपनी ढपली अपने राग अकेले ही अलापते रहते हैं। सत्ता को उखाड़ फेंकने की शुरुआत तो सदैव से इसी तरह होती रही है, लेकिन आग की वह चिंगारी धीरे—धीरे समाज में इसी तरह भड़कती रहती और फिर जब उस चिंगारी का अहसास समाज को होने लगता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
ऐसी ही शुरुआत 18 मार्च 1974 को बिहार की राजधानी पटना में छात्र आंदोलन के रूप में हुई थी, जिसे ‘जेपी आंदोलन’ का नाम दिया गया। बाद में, महान गांधीवादी और समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने इसका नेतृत्व संभाला और इसे ‘संपूर्ण क्रांति’ का नाम दिया। दरअसल, इसकी शुरुआत और विकास इसप्रकार हुआ। 1970 के दशक में देश में बढ़ती बेरोजगारी, चरम पर पहुंच चुकी महंगाई, भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ आम जनता और छात्र त्रस्त थे। फरवरी-मार्च 1974 में छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर बिहार की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया। 18 मार्च 1974 को जब छात्र बिहार विधानसभा का घेराव करने गए, तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया और गोलीबारी की, जिसमें कई छात्र शहीद हो गए। हिंसक झड़पों और पुलिस दमन के बाद आक्रोशित छात्र जयप्रकाश नारायण के पास पहुंचे और उनसे आंदोलन का नेतृत्व करने की अपील की। जयप्रकाश नारायण ने इस शर्त पर नेतृत्व स्वीकार किया कि आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक रहेगा। जून 1974 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए जेपी ने ‘संपूर्ण क्रांति’ का नारा दिया। उनका उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव लाना था। यह आंदोलन देखते ही देखते पूरे देश में फैल गया और इसने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार को हिलाकर रख दिया, जिसके परिणाम स्वरूप 1975 में देश में आपातकाल लागू किया गया। देश में आपातकाल लगाना तत्कालीन कांग्रेस सरकार की कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि गिरावट का प्रथम चरण साबित हुआ था।
अगर यह देश मानता है कि कांग्रेस का आपातकाल घोषित करना संविधान और जन मानस के लिए एक अभिशाप था, तो आज उस जले पर सर्वोच्च न्यायालय की अलिखित टिप्पणी ने नमक का छिड़काव नहीं किया है? युवा तो अपनी गरीबी और बेरोजगारी से स्वयं त्रस्त हैं, सर्वोच्च न्यायालय की उस टिप्पणी ने उस आग में घी का काम किया है। एक साधारण जन से पूछिए तो उसका भी यही कहना है कि इस तरह के कटाक्ष करने का किसी को कोई अधिकार संविधान नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और एक्टिविस्ट्स को लेकर ‘कॉकरोच’ (तिलचट्टे) और ‘परजीवी’ जैसी टिप्पणी की थी। यह टिप्पणी सिस्टम को नुकसान पहुंचाने वाले उन लोगों पर तंज कसने के लिए की गई थी, जो कथित तौर पर फर्जी डिग्री के जरिये विभिन्न पेशों में घुसपैठ करते हैं। 15 मई 2026 को एक मामले की सुनवाई के दौरान, अदालत का ध्यान इस बात पर गया कि कुछ लोग फर्जी और जाली डिग्री के आधार पर वकालत, मीडिया और सामाजिक सक्रियता जैसे क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी कि रोजगार न मिलने के कारण हताश हुए कुछ युवा सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और कार्यकर्ता बन जाते हैं और बिना ठोस आधार के सिस्टम, न्यायपालिका और पेशेवरों पर हमला करने लगते हैं। इस मुद्दे पर देश में बबाल मचा हुआ है और अब एक नया दल गठित कर लिया गया है जिसका नाम ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ रखा गया है , जिसका नेतृत्व अभिजीत दिपके नामक युवक कर रहा है। उसी क्रम में पिछले सप्ताह दिल्ली के जंतर मंतर पर सैकड़ों युवाओं ने प्रदर्शन किया और कहा कि यह लड़ाई एक दिन की नहीं है और यह आंदोलन देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जारी रहेगा।
वैसे, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का उनके कार्यकाल और विशेष रूप से नीट के पेपर लीक मामले को लेकर भी देश का माहौल गर्माया हुआ है। सच तो यह है कि युवाओं का सारा आक्रोश तो नीट पेपर लीक मामले को लेकर गरम है; क्योंकि छात्रों ने जमकर अपनी पढ़ाई की थी और ऐन परीक्षा के समय ही पेपर लीक हो गया। सभी उम्मीदवार छात्रों के आशाओं पर पानी फिर गया। छात्र संगठनों का कहना है कि देश के वर्तमान शिक्षामंत्री के कार्यकाल में 80 बार छात्रों को गुमराह होना पड़ा, क्योंकि इसके पीछे जो कारण बताया जा रहा है, वह यह कि कुछ सरकारी अधिकारी, शिक्षक और बिचौलिया करने वाले दलालों ने छात्रों के भविष्य को अंधकारमय बना दिया है। अतः शिक्षामंत्री को तुरंत त्यागपत्र देना चाहिए। हां, यह सच है कि पेपर लीक के मामले में केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक साक्षात्कार में अपनी गलती स्वीकार की है, लेकिन धीरे धीरे देश में तरह तरह के दल बन रहे हैं जो किसी भी दशा में किसी भी सरकार के लिए हितकारी नहीं हैं। आखिर ऐसा क्या सुर्खाब के पंख लगे हुए हैं शिक्षामंत्री में जिनसे केंद्रीय सरकार को उनसे त्यागपत्र लेने में कठिनाई हो रही है और धीरे—धीरे देश का माहौल बिगड़ता जा रहा है। दरअसल, सच तो यह है कि मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि से आए हुए ऐसे नेताओं से त्यागपत्र लेना सरकार को भारी पड़ सकता है? इसलिए इतिहास तो हमें यही सीख देता है कि हर मकान की नींव में जब पहली ईंट रखी जाती है, तभी एक भवन का निर्माण शुरू होता है। आज जो निस्तब्धता और नीरवता देश भर में दिखाई दे रही है, कहीं उसका परिणाम भविष्य में नुकसानदेह तो साबित नहीं होगा?

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!