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सरकारी जमीन की सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, सभी गैर मजरूआ आम भूमि को तत्काल रोक सूची में डालें : डॉ. दिलीप जायसवाल

15 दिन में सुधार दिखे, नहीं तो होगी कार्रवाई, ऑफलाइन काम करते पकड़े गए अधिकारियों पर भी चलेगा विभागीय दंडात्मक प्रावधान

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/पटना : माननीय राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने समीक्षा के आठवें दिन भोजपुर, मधेपुरा एवं अरवल जिलों के राजस्व कार्यों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि गैर मजरूआ आम श्रेणी की सभी जमीनों की पहचान कर उन्हें तत्काल सरकारी रोक सूची में दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि जमाबंदी रद्दीकरण के मामलों को भी रोक सूची में शामिल कर सुरक्षित किया जाए तथा इसकी सूची राज्य के निबंधन विभाग को भी उपलब्ध कराई जाए ताकि सरकारी भूमि की अवैध खरीद-बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
माननीय मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकारी जमीन से ही जिलों में लैंड बैंक तैयार कर विकास योजनाओं को गति दी जा रही है। ऐसे में सरकारी भूमि की सुरक्षा और संरक्षण में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
समीक्षा के दौरान विभागीय सचिव श्री जय सिंह ने बताया कि सभी अंचल अधिकारियों के लॉगिन में सरकारी जमीन की प्राथमिक सूची उपलब्ध करा दी गई है। इसकी जांच कर अंतिम सूची उपलब्ध करानी होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के बाद संबंधित अधिकारियों से उनके क्षेत्र में कोई सरकारी भूमि छूट नहीं जाने का शपथ पत्र भी लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि रोक सूची वह सूची है जिसमें खरीद–फरोख्त नहीं की जानेवाली सभी जमीन शामिल है। इसका उद्देश्य सरकारी जमीनों का संरक्षण करना है।
मंत्री डॉ. जायसवाल ने अंचलवार रैंकिंग, दाखिल-खारिज, डिफेक्ट चेक, ऑनलाइन म्यूटेशन, परिमार्जन, ई-मापी, अभियान बसेरा-2, सरकारी भूमि सत्यापन, राजस्व महा अभियान, लोक शिकायत, सहयोग शिविर, किसान पंजीकरण तथा आरसीएमएस के तहत न्यायालयों में लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा की।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि विभाग की सभी सेवाएं पूर्णतः ऑनलाइन हैं और सभी कार्य ऑनलाइन माध्यम से ही किए जाएं। ऑफलाइन कार्य करते पकड़े जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
ई-मापी की समीक्षा के दौरान मंत्री ने कहा कि प्रत्येक अमीन को प्रति माह 15 से 20 मापी करने का लक्ष्य दिया गया है, लेकिन अधिकांश जिलों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है। उन्होंने ई-मापी मामलों में भी ‘फर्स्ट इन-फर्स्ट आउट (FIFO)’ प्रणाली का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया।
विभाग में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की टीम की तैनाती का उल्लेख करते हुए डॉ. जायसवाल ने कहा कि यदि मंत्री और विभागीय अधिकारी ईमानदारी से काम कर रहे हैं तो राजस्व तंत्र के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी पूर्ण ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ कर्मियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर विभाग की छवि सुधारना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि छुट्टी पर जानेवाले अधिकारियों के बदले उस अंचल की जिम्मेवारी वैसे अधिकारियों को दी जाय जिनकी कार्यक्षमता बेहतर हो। अभी यह देखने में आ रहा है कि बगल के अधिकारी को चार्ज देने की परंपरा है और वैसे अधिकारी पर और कार्य छोड़ दिया जा रहा है जो अपने पदस्थापित अंचल का कार्य भी सही तरीके से नहीं कर पाते।
उन्होंने दो टूक कहा कि वर्तमान में अधिकांश अंचलों का प्रदर्शन अपेक्षित स्तर का नहीं है। 15 दिन बाद होने वाली अगली समीक्षा में सभी अंचलों को अपना रिकॉर्ड सुधारना होगा, अन्यथा उपलब्ध आंकड़ों और प्रदर्शन के आधार पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में सचिव श्रीमती सीमा त्रिपाठी ने भी आंकड़ों के आधार पर अधिकारियों को आवश्यक सुधारात्मक सुझाव दिए। वहीं अपर सचिव श्री प्रशांत सीएच ने किसान पंजीकरण की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में विशेष सचिव श्रीमती इनायत खान, अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल, अपर सचिव श्री आजीव वत्सराज, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री मणि भूषण किशोर, उप निदेशक श्रीमती मोना झा, सहायक निदेशक सह जनसंपर्क पदाधिकारी सुश्री जूही कुमारी, आईटी मैनेजर श्री आनंद शंकर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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