
रांची, 26 मई 2026: झारखंड सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने राज्य में सरना, सनातन और डीलिस्टिंग को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलेगा, बाबूलाल के फरमान से नहीं। मंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान की मूल भावना धर्मनिरपेक्षता है और हर नागरिक को अपनी आस्था और धर्म चुनने, उसका पालन करने तथा प्रचार करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस द्वारा डीलिस्टिंग, सरना और ईसाई समुदाय को लेकर जो माहौल बनाया जा रहा है, उसके पीछे समाज को धार्मिक आधार पर बांटने की राजनीति छिपी हुई है। शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज को आपस में लड़ाकर जल, जंगल और जमीन पर कॉरपोरेट कब्जे का रास्ता तैयार किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश के कई राज्यों में इसके उदाहरण सामने आ चुके हैं। मंत्री ने ओडिशा के नियमगिरि पहाड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि वहां वेदांता की बॉक्साइट खनन परियोजना के खिलाफ डोंगरिया कोंध आदिवासियों ने वर्षों संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों ने नियमगिरि को अपनी आस्था, संस्कृति और अस्तित्व का केंद्र बताया था।उन्होंने ओडिशा के सीजीमाली पहाड़ी क्षेत्र का भी उल्लेख किया, जहां खनन परियोजनाओं के विरोध में ग्रामीण और महिलाएं आंदोलन कर रहे हैं। मंत्री के अनुसार स्थानीय लोगों को डर है कि खनन से जंगल, जलस्रोत, खेती और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित होगी। छत्तीसगढ़ के हसदेव जंगल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वहां जंगलों को खनन परियोजनाओं के लिए सौंपा गया, जिससे आदिवासी समुदाय विस्थापन और अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है। मंत्री ने कहा कि झारखंड की पहचान आदिवासी-मूलवासी संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और संघर्ष की विरासत से है तथा राज्य की जनता नफरत और धार्मिक उन्माद की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।उन्होंने लोगों से भाजपा और आरएसएस के विभाजनकारी और कॉरपोरेटपरस्त एजेंडे से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि झारखंड की जनता जल, जंगल, जमीन और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट है।

