ताजा खबर

*जलकुंभी से खाद बनाकर मखाने की खेती में इस्तेमाल कर रहें किसान*

* दो महीने में 500 किलो खाद बनाया
* पंचायत के वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट से बन रही खाद

त्रिलोकी नाथ प्रसाद।बिहार के किसान जैविक खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। वे खुद से जैविक खाद भी तैयार करने में जुटे हैं। सहरसा जिले के मुरादपुर पंचायत में किसानों ने एक अनोखा प्रयोग शुरू किया है। पोखरों और तालाबों में उगने वाली जलकुंभी को लोग पहले समस्या मानकर फेंक देते थे। अब उसी से उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कम्पोस्ट बनाई जा रही है। यह खाद विशेष रूप से मखाना की खेती में इस्तेमाल की जा रही है।

पंचायत के मुखिया राहुल झा ने बताया कि इस क्षेत्र में मखाना बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। इसके लिए जलकुंभी का खाद उपयोग किया जा रहा है।
पिछले करीब एक साल से पंचायत की वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट में जलकुंभी से खाद बनाने का काम चल रहा है। बीते दो महीनों में ही लगभग 500 किलोग्राम खाद तैयार की जा चुकी है। रोजाना करीब 20 किलोग्राम खाद बन रही है। इसमें पंचायत के करीब 15 परिवार खासकर महिलाएं सक्रिय रूप से शामिल हैं। वे खाद को अपने मखाना की खेती में इस्तेमाल भी कर रहे हैं। इससे उन्हें रासायनिक खाद खरीदने की जरूरत कम हुई है और उत्पादन में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

उन्होंने आगे बताया कि खाद तैयार करने के लिए सबसे पहले जलकुंभी को पानी से निकालकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। इसे गोबर के साथ अच्छी तरह मिलाया जाता है। मिश्रण को लगभग 45 दिनों तक छांव में सुखाया जाता है।
इस दौरान इसमें केंचुए छोड़ दिए जाते हैं, जो इसे वर्मीकम्पोस्ट में बदल देते हैं।
यह जैविक खाद पंचायत के किसानों को मुफ्त में उपलब्ध हो रही है। आगे इसे बड़ी मात्रा में तैयार कर किसानों को बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।

इस खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम के अलावा मैग्नीशियम, आयरन, मैग्नीज, जिंक जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, फसल की लागत कम होती है और मखाना का उत्पादन बेहतर होता है।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!