किशनगंज : आरबीएसके बना नन्हे कदमों का सहारा, क्लब फुट से पीड़ित तीन बच्चों को भागलपुर रेफर

किशनगंज, 10 जून (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत क्लब फुट (टेढ़े पैर की जन्मजात विकृति) से पीड़ित बच्चों को समय पर पहचान और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराकर उनके जीवन को नई दिशा दी जा रही है। इसी क्रम में बुधवार को जिले के तीन बच्चों माहिर रजा, जगरनाथ सिंह और रफिया नाज को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल किशनगंज से जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जेएलएनएमसीएच), भागलपुर रेफर किया गया।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित आरबीएसके योजना के तहत इन बच्चों के इलाज की संपूर्ण व्यवस्था निःशुल्क सुनिश्चित की गई है। योजना का उद्देश्य जन्मजात बीमारियों और विकृतियों से पीड़ित बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाना है, ताकि उनका प्रभावी उपचार हो सके।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि क्लब फुट एक जन्मजात विकृति है, जिसमें बच्चे का एक या दोनों पैर सामान्य स्थिति से मुड़े हुए होते हैं। यदि समय रहते इसका उपचार शुरू कर दिया जाए तो अधिकांश बच्चे पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं। उन्होंने कहा कि आरबीएसके के माध्यम से ऐसे बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास भेजा जा रहा है, जिससे भविष्य में होने वाली जटिलताओं को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इलाज पर आने वाले भारी खर्च से परिवारों को राहत मिल रही है और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध हो रही हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि किसी नवजात या छोटे बच्चे में पैर या अन्य अंगों की असामान्य स्थिति दिखाई दे तो तत्काल स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें।
जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे के इलाज में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि आरबीएसके जैसी योजनाएं ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत कर रही हैं तथा जरूरतमंद बच्चों को समय पर बड़े अस्पतालों तक पहुंचाकर उनके बेहतर भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में आरबीएसके के माध्यम से लगातार जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ संस्थानों में निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे सैकड़ों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।



