ब्रेकिंग न्यूज़

पत्रकार समाज का आयना है, जब आयना ही टुट,फूट जायें तो वास्विक चेहरा लोग कैसे देख पायेगें।

अनिल कुमार मिश्र।भंयाक्रांत पत्रकारों को प्रशासनिक भय से जनहित में बाहर लाना ही आपदा पर नियंत्रण का अच्छा संकेत और विकल्प है।

आपदा की घडी और कोराना कोविड-19 की महामारी में बिहार के औरंगाबाद जिले अंतर्गत डीएम एवं एसपी के माननीय संवेदना एवं प्रशासनिक कार्यशैली जनहित में है फिर भी चंद पत्रकारों की चापुलिस एव पत्रकारों की दबी आवाज के कारण जनता को जान गवाने पड़ रहे है। उक्त बाते केवल सच को भेट वार्ता में प्रबुद्धजनों ने कहा।आपदा की घड़ी में माननीय संवेदना जनमानस को झकझोर कर रख दिया है । प्रबुद्धजनों नें बिहार राज्य के औरंगाबाद जिले के जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से मांग किया है की जिला प्रशासन द्वारा पत्रकारों को जनता की आवाज को जिला प्रशासन तथा सरकार तक पहुंचाने को कहा जाए और जनसंवाद की समीक्षा जिलास्तर पर अलाधिकारियों के बीच किया जाये तथा प्रखंड के पदाधिकारियों को जिले के वरीय पदाधिकारियों के आदेश को अक्षरसह पालन करने का निर्देश भी दिया जाये तभी आपदा की घड़ी एव कोरोना (कोविड-19) की महामारी पर नियंत्र संभव है।

प्रबुद्धजनों ने जनसंवाद में कहा है पत्रकार समाज का आयना है, जब आयना ही टुट,फूट जायें या भयाक्रांत हो तो वास्विक चेहरा लोग कैसे दिख पायेगें। प्रबुद्धजनों की बातों को मान लिया जाये तो भंयाक्रांत पत्रकारों को प्रशासनिक भय से जनहित में बाहर लाना ही आपदा पर नियंत्रण का अच्छा संकेत और विकल्प है।

प्रबुद्धजनों ने प्रशासनिक चापुलिस व गोरखधंधा में जुड़े पत्रकारों पर कड़ी प्रतिक्रिया ब्यक्त करते हूए कहा, यह आपदा की घड़ी है लूटने का समय नहीं है । आप भी अपने कर्तव्यों का पालन करने,वरणा/ नहीं तो नफरत पैदा करने वाले नेताओं के तरह चले जायेंगे और सारा दौलत यहाँ ही धरा के धरा रह जायेगा।

आतक के छायें मे जी रहे पत्रकारों तथा चापलूसी में जुड़े पत्रकारों से भी प्रबुद्धजनों ने आग्रह किया है कि आपदा की घड़ी में जिला प्रशाहन व सरकार के बीच निष्पक्ष खबरों तथा जनता की माँग व अवाज को रखें, जिससे जनमानस को कल्याण हो सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button