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बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने बिहार विधान सभा के सत्र के दौरान विधान सभा परिसर के आसपास हुई घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से रखने का अधिकार है, किन्तु विरोध के नाम पर जनप्रतिनिधियों का घेराव करना, उनके साथ अभद्र व्यवहार करना, सरकारी एवं निजी वाहनों में तोड़फोड़ करना तथा विधायकों की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले कृत्य किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।

माननीय अध्यक्ष ने कहा कि बिहार विधान सभा लोकतंत्र का सर्वोच्च विधायी मंच है, जहाँ जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि प्रदेश के विकास, जनहित और नीतिगत विषयों पर विचार-विमर्श करने आते हैं। ऐसे समय में सदन की कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए, विधायकों को रोकना, अभद्रता,गाड़ी की तोड़फोड़ अथवा जनप्रतिनिधियों को भय एवं दबाव के वातावरण में कार्य करने के लिए विवश करने का कोई भी प्रयास लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध है।

डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि छात्रों एवं युवाओं की समस्याएँ महत्वपूर्ण हैं और उनका समाधान संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने सभी छात्र संगठनों एवं प्रदर्शनकारियों से संयम, शांति एवं कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने की अपील की।

उन्होंने संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों से कहा कि घटना की निष्पक्ष जाँच कर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा भविष्य में बिहार विधान सभा की सुरक्षा, माननीय सदस्यों की गरिमा और परिसर की पवित्रता बनाए रखने के लिए आवश्यक एवं प्रभावी कदम उठाए जाएँ।

माननीय अध्यक्ष ने सभी राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया कि लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय मर्यादाओं तथा संवाद की परंपरा को सुदृढ़ करने में सकारात्मक सहयोग दें। लोकतंत्र की सफलता असहमति के सम्मान, संवैधानिक मर्यादा और शांतिपूर्ण संवाद पर आधारित है।

डॉ. प्रेम कुमार ने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार की जनता, छात्र-युवा, जनप्रतिनिधि तथा सभी राजनीतिक दल लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को बनाए रखने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएँगे।

 

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