चुप्पी नहीं, संवाद बचाएगा जिंदगी: मानसिक संकट में साथ देने पर जोर
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर सदर अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम, समय पर पहचान और उपचार से जोड़ने का संदेश

किशनगंज, 10 सितंबर (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सदर अस्पताल, किशनगंज में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समय पर पहचानने, संवेदनशील बातचीत करने और जरूरतमंद व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया।
जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही गंभीरता से लेने की जरूरत है। किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव, लगातार निराशा, सामाजिक गतिविधियों से दूरी या अत्यधिक मानसिक दबाव दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। परिवार, समाज, शिक्षण संस्थानों और कार्यस्थलों की सामूहिक भूमिका से ऐसा वातावरण बनाया जा सकता है, जहां व्यक्ति बिना झिझक अपनी परेशानी साझा कर सके।
डॉ. उर्मिला कुमारी ने कहा कि लगातार उदासी, निराशा, लोगों से दूरी बनाना, व्यवहार में बदलाव और जीवन को लेकर अत्यधिक नकारात्मक सोच जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानसिक स्थिति को लेकर किसी व्यक्ति से संवेदनशीलता के साथ बातचीत करना जरूरी है। बातचीत से उसे यह भरोसा मिलता है कि वह अकेला नहीं है और उसकी परेशानी सुनने वाला कोई मौजूद है।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि आत्महत्या के पीछे कई सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक और मानसिक कारण हो सकते हैं। मानसिक परेशानी को कमजोरी समझकर छिपाने के बजाय समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को परामर्श और उपचार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में डॉ. मंजर आलम, डॉ. देवेंद्र कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे। कार्यक्रम में संदेश दिया गया कि मानसिक संकट में व्यक्ति को समझने और उसकी बात सुनने की शुरुआत एक सरल सवाल-“आप ठीक हैं?”-से की जा सकती है।



