किशनगंज : 20 साल से फाइलेरिया से जंग, अब अनिल बने जागरूकता की आवाज
पेशे से धोबी अनिल रजक खुद हाथीपांव से पीड़ित, गांव-गांव जाकर लोगों को कर रहे जागरूक

किशनगंज, 01 सितंबर (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से पिछले करीब 20 वर्षों से जूझ रहे 41 वर्षीय अनिल रजक अब अपनी पीड़ा को समाज में जागरूकता का माध्यम बना रहे हैं। पेशे से धोबी अनिल खुद हाथीपांव से प्रभावित हैं। इसके बावजूद बीमारी को छिपाने के बजाय वे गांव-गांव जाकर लोगों को फाइलेरिया के लक्षण, बचाव और प्रभावित अंग की देखभाल के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
अनिल बताते हैं कि फाइलेरिया के शुरुआती लक्षणों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। जब वे ग्रामीणों को अपना प्रभावित अंग दिखाकर बताते हैं कि करीब दो दशक से वे इस बीमारी के साथ जीवन जी रहे हैं, तो लोग उनकी बात को गंभीरता से सुनते हैं। उनका कहना है कि वे नहीं चाहते कि किसी दूसरे व्यक्ति को भी वही परेशानी झेलनी पड़े।
उन्होंने लोगों से प्रभावित अंग की नियमित सफाई, उचित व्यायाम, आराम और स्वच्छता का ध्यान रखने की अपील की। साथ ही मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करने और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि जिले में अब तक 1853 फाइलेरिया मरीजों की पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि प्रभावित अंग की नियमित देखभाल और व्यायाम से बीमारी को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। मरीजों के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया को लेकर समाज में मौजूद भ्रांतियां इसके नियंत्रण में बाधा बनती हैं। समय पर स्वास्थ्य विभाग से संपर्क और नियमित रोग प्रबंधन जरूरी है।
जिलाधिकारी नवीन कुमार ने भी अनिल रजक के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सरकारी प्रयासों के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है। मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम में सहयोग करना चाहिए।



