किशनगंज : बच्चे की हर हरकत एक संकेत, पहले साल में पहचानें विकास की भाषा

किशनगंज, 11 अगस्त (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, शिशु के जीवन का पहला वर्ष उसके शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भाषाई विकास की नींव रखने वाला महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान बच्चे का रोना, मुस्कुराना, आवाज पर प्रतिक्रिया देना, वस्तुओं को पकड़ना, बैठना, रेंगना और इशारा करना जैसी गतिविधियां उसके विकास के महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को केवल बच्चे के वजन और लंबाई पर ही नहीं, बल्कि उसकी उम्र के अनुरूप विकासात्मक गतिविधियों पर भी नजर रखनी चाहिए।
जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि बच्चे के स्वास्थ्य और विकास को लेकर परिवार की जागरूकता बेहद जरूरी है। शुरुआती उम्र में किसी समस्या की पहचान होने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक हस्तक्षेप किया जा सकता है।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी के अनुसार, जन्म के बाद बच्चा मुख्य रूप से रोने के माध्यम से अपनी जरूरत बताता है। धीरे-धीरे वह आवाज और चेहरे की ओर ध्यान देने लगता है तथा दूसरे महीने के आसपास मुस्कुराकर प्रतिक्रिया देने लगता है। इस दौरान स्तनपान, सुरक्षित स्पर्श और बच्चे से लगातार बातचीत जरूरी है।
चार से छह महीने में बच्चा आसपास की वस्तुओं को देखने और पकड़ने की कोशिश करता है। महिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शबनम यास्मीन ने बताया कि इस उम्र में माता-पिता द्वारा बच्चे से बातचीत और खेलना उसके सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। छह महीने के बाद आयु के अनुरूप पूरक आहार भी जरूरी है।
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनवर हुसैन के अनुसार, नौ महीने के आसपास बच्चा बैठने, रेंगने और सहारे से खड़े होने की कोशिश करता है। एक वर्ष तक वह वस्तुओं को उठाने, देने और इशारों से अपनी जरूरत बताने जैसी गतिविधियां करने लगता है।
शिशु विशेषज्ञ डॉ. मंजर आलम ने कहा कि यदि बच्चा आवाज पर प्रतिक्रिया नहीं देता, आंखों से संपर्क नहीं बनाता या उम्र के अनुरूप विकासात्मक गतिविधियों में लगातार पीछे दिखाई देता है तो अभिभावकों को चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। हर बच्चा समान गति से विकसित नहीं होता, लेकिन ऐसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।



