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किशनगंज : मंडल कारा में बंदियों को मिल रहा हुनर, रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनने की राह

किशनगंज, 08 अगस्त (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, मंडल कारा अब केवल बंदियों को रखने का केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि उन्हें सुधार और नई जिंदगी की राह दिखाने का माध्यम भी बन रहा है। जेल प्रशासन की ओर से बंदियों को विभिन्न रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल की जा रही है। इसका उद्देश्य बंदियों को हुनरमंद बनाकर उन्हें सम्मानजनक रोजगार से जोड़ना और समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है, ताकि वे दोबारा अपराध की ओर न लौटें।

जानकारी के अनुसार, मंडल कारा में अब तक करीब 150 बंदियों को विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक प्रशिक्षण दिए जा चुके हैं। इनमें कंप्यूटर संचालन, अगरबत्ती निर्माण, मोमबत्ती निर्माण, बकरी पालन सहित अन्य स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण शामिल हैं। प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को संबंधित कार्य की तकनीकी जानकारी देने के साथ-साथ रोजगार शुरू करने के व्यावहारिक पहलुओं की भी जानकारी दी जाती है।

प्रशिक्षण पूरा करने वाले बंदियों को संबंधित विभाग की ओर से प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराया जाता है। जेल प्रशासन का मानना है कि ये प्रमाण पत्र रिहाई के बाद बंदियों को रोजगार प्राप्त करने के साथ ही स्वरोजगार के लिए ऋण एवं अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में सहायक साबित हो सकते हैं।

वर्तमान में मंडल कारा में 628 विचाराधीन और 47 सजायाफ्ता बंदी हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मुख्य रूप से ऐसे बंदियों को शामिल किया जाता है, जो प्रशिक्षण का लाभ उठाकर रिहाई के बाद रोजगार या स्वरोजगार शुरू कर सकें।

हुनर मिलने से अपराध की दुनिया से निकलने का मिलेगा अवसर

जेल अधीक्षक धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि कई बंदी विभिन्न परिस्थितियों के कारण अपराध की दुनिया में पहुंचे हैं। ऐसे में यदि उन्हें जेल में ही कोई हुनर सिखा दिया जाए तो रिहाई के बाद उनके सामने रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने की राह आसान होगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और कारा प्रशासन का प्रयास सुधारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसी उद्देश्य से मंडल कारा में समय-समय पर कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इनका मकसद बंदियों को आत्मनिर्भर बनाकर नई शुरुआत का अवसर देना है, ताकि वे रिहाई के बाद अपने परिवार का भरण-पोषण स्वयं कर सकें और समाज के जिम्मेदार नागरिक के रूप में नई पहचान बना सकें।

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