सहरसा : छठ घाट निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप, तकनीकी जांच की उठी मांग
सहरसा, 07 अगस्त (के.स.)। डेस्क, नगर परिषद सिमरी बख्तियारपुर के वार्ड संख्या-14 स्थित रंगिनिया तालाब में करीब 79 लाख रुपये की लागत से चल रहे जीर्णोद्धार एवं छठ घाट सीढ़ी निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण कार्य में इकरारनामा की शर्तों के विपरीत निम्न गुणवत्ता की सामग्री एवं अनधिकृत स्टील के उपयोग का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय जनता दल के नगर अध्यक्ष सुरेंद्र यादव ने नगर विकास एवं आवास विभाग के कार्यपालक अभियंता को शिकायत पत्र भेजकर उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, संवेदक द्वारा स्वीकृत इकरारनामा में निर्धारित टाटा, श्याम, सेल एवं विजैग जैसे स्टील ब्रांडों के बजाय अन्य स्थानीय एवं कथित रूप से निम्न गुणवत्ता वाले स्टील, विशेषकर मगध ब्रांड का उपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि यह कार्य विभागीय मिलीभगत और कनीय अभियंता की अनुपस्थिति में कराया जा रहा था, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया गया कि निर्माण कार्य शुरू होते ही स्थानीय युवकों ने कार्यस्थल पर विरोध दर्ज कराया और सोशल मीडिया के माध्यम से भी मामले को उठाया। इसके बाद नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी राम विलास दास स्वयं निर्माण स्थल पर पहुंचे और निरीक्षण के बाद जांच पूरी होने तक कार्य पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया।
सुरेंद्र यादव ने अपने पत्र में मांग की है कि यदि स्वीकृत स्टील ब्रांड में परिवर्तन के लिए कार्यपालक अभियंता अथवा अधीक्षण अभियंता स्तर से अनुमति दी गई है तो उससे संबंधित सक्षम प्राधिकारी के लिखित आदेश की सत्यापित प्रति सार्वजनिक की जाए। वहीं यदि बिना अनुमति के इकरारनामा से हटकर सामग्री का उपयोग किया गया है तो संबंधित संवेदक के विरुद्ध संविदा की शर्तों एवं प्रचलित नियमों के तहत कड़ी अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी मांग की है कि इकरारनामा के विपरीत कराए गए निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए तथा यदि अनियमितता की पुष्टि होती है तो ऐसे हिस्से को तोड़कर स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए। साथ ही निर्माण में प्रयुक्त स्टील एवं अन्य सामग्रियों की गुणवत्ता की जांच किसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने कहा कि सरकारी राशि के संरक्षण और जनहित को देखते हुए मामले में शीघ्र एवं पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक है।



