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शहाबुद्दीन और लालू की बातचीत आडियो हुआ वायरल….कहा खत्म है आप का एसपी…..।
टीवी चैनल पर लालू प्रसाद और शहाबुद्दीन के बीच बातचीत का कथित ऑडियो टेप वायरल करने के मामले में एसपी सौरव कुमार शाह कानूनी सलाह लेकर ही आगे की कार्रवाई करने की तैयारी में हैं।एसपी ने बताया कि वे हर पहलू की जांच कर रहे हैं।इसके लिए चैनल से ऑडियो की क्लिप मांगी गई है।क्लिप मिलने के बाद फॉरेंसिक लैब में इसकी जांच होगी।वायरल ऑडियो की पुष्टि होने के बाद ही इसमें अगली कार्रवाई होगी। इसलिए मुख्यालय से जब तक कोई सूचना नहीं आती है फिलहाल इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है।एसपी ने बताया कि जेल से मामला जुड़ने के कारण कानूनी सलाह जरूरी है।बताते चलें कि जो ऑडियो टेप वायरल किया गया है उसमे

कांग्रेस दोराहे पर थी।सिवान एसपी को शहाबुद्दीन द्वारा खत्म बताया गया है आपको बताते चले की लालू-शहाबुद्दीन बातचीत प्रकरण में एनडीए की सहयोगी दल हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा ने भी राजद का समर्थन करते हुए नीतीश कुमार के खिलाफ हमला बोल दिया है।हम के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ दानिश रिजवान ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री के इशारे पर राजद और विपक्षी दलों के नेताओं,पत्रकारों और अधिकारियों के फोन टेप किए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि लालू-शहाबुद्दीन में बातचीत लीक से साबित हो गया कि मुख्यमंत्री के इशारे पर फोन पर नजर रखी जा रही है।यह एक गंभीर मामला है और केन्द्र को इसमें हस्तक्षेप कर उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए।राजद प्रमुख लालू प्रसाद फिर नई मुसीबत में हैं।जेल में बंद पार्टी के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन से बात कर लालू ने विरोधियों को बोलने का मौका दे दिया है। यह प्रकरण तब सामने आया है जब लालू प्रसाद देश की तमाम सेक्यूलर पार्टियों को एक मंच पर लाने की जुगत लगा रहे हैं।लालू को मुसीबत में देखने के बाद भी कांग्रेस मौन है।जिसकी अपनी ही वजहें हैं।विश्लेषक मानते हैं कि कांग्रेस के नए नेतृत्व को,जिसके मुखिया पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी हैं लालू प्रसाद की राजनीति पंसद नहीं है।परन्तु यह राजनीतिक मजबूरी ही थी कि लालू से परहेज के बाद भी कांग्रेस बिहार में बने महागठबंधन का हिस्सा बनी।इसका कारण भी साफ है।2014 के लोकसभा

चुनाव में एनडीए से पराजय के बाद कांग्रेस दोराहे पर थी।तब कांग्रेस बिहार के महागठबंधन का हिस्सा बनी जिसमें लालू भी थे। महागठबंधन में कांग्रेस को चालीस सीटें दिए जाने पर राजद को आपत्ति थी।नीतीश कुमार की दखल अंदाजी पर कांग्रेस को 40 सीटें मिली।राजद का विरोध कांग्रेस को पसंद नहीं आया।पर वह मौन रही।संबंधों में तल्खी और बढ़ी।बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान भी कांग्रेस की अनदेखी हुई।चार सीट पर हो रहे चुनाव में राजद-जदयू ने दो-दो सीटें बांट लीं।कांग्रेस का फैसले पर विरोध था।पर जब कोई रास्ता नहीं निकला तो उसने उन दो सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए जहां राजद चुनाव लड़ रहा था।हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में गोवा और मणिपुर में ज्यादा सीटें जीतने के बाद भी कांग्रेस के सरकार न बना पाने पर लालू प्रसाद ने बगैर किसी का नाम लिए कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए।उस वक्त को कांग्रेस ने जवाब नहीं दिया,पर अब जब लालू मुसीबत में है तो कांग्रेस लालू प्रसाद का बचाव करने से परहेज कर रही है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता व उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर की टिप्पणी मौन जैसी ही है कि लालू प्रसाद प्रकरण पर ज्यादा बेहतर बता सकते हैं।






