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भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल का प्रेस बयान।

सनातन शाश्वत है, इसे मिटाने का विचार केवल मानसिक दिवालियापन, डीएमके नेता उदयनिधि का बयान खेद जनक_ प्रेम रंजन पटेल

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/तमिलनाडु सरकार के मंत्री रहे डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को समाप्त करने संबंधी दिया गया बयान न केवल करोड़ों सनातनियों की आस्था पर आघात है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और हजारों वर्षों की सभ्यता के विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण मानसिकता को भी प्रदर्शित करता है। ऐसा बयान किसी स्वस्थ वैचारिक विमर्श का हिस्सा नहीं हो सकता, बल्कि यह मानसिक विक्षिप्तता, अहंकार और भारतीय संस्कृति के प्रति अज्ञानता का प्रतीक है।
सनातन कोई साधारण पंथ, संगठन या राजनीतिक विचारधारा नहीं है जिसे कोई व्यक्ति, दल या सत्ता समाप्त कर दे। सनातन वह शाश्वत सत्य है जिसने विश्व को “वसुधैव कुटुम्बकम”, मानवता, सहिष्णुता, करुणा, धर्म और कर्तव्य का मार्ग दिखाया है। यह वह परंपरा है जिसने आक्रमण झेले, अत्याचार देखे, लेकिन हर बार और अधिक शक्तिशाली होकर उभरी। इतिहास साक्षी है कि जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, वे स्वयं इतिहास के अंधकार में विलीन हो गये, जबकि सनातन आज भी विश्व को प्रकाश देने का कार्य कर रहा है।
सनातन धर्म को समाप्त करने की बात करने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि सनातन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और मानव जीवन के संतुलन का आधार है। यह जन्म से लेकर मृत्यु तक मानव को जीवन जीने की मर्यादा, संस्कार और नैतिकता सिखाता है। जिस विचारधारा ने पूरी दुनिया को योग, आयुर्वेद, अध्यात्म और मानव कल्याण का संदेश दिया हो, उसे समाप्त करने की सोच रखना ही अज्ञानता की पराकाष्ठा है।
देश की जनता ऐसे विभाजनकारी और समाज को भड़काने वाले बयानों का लोकतांत्रिक तरीके से करारा जवाब देगी। राजनीतिक लाभ के लिए सनातन पर हमला करना करोड़ों लोगों की भावनाओं का अपमान है। भारत की जनता कभी भी अपनी आस्था, संस्कृति और सभ्यता का अपमान सहन नहीं करेगी।
जो लोग सनातन को समझ लेते हैं, उनके भीतर ज्ञान, विनम्रता और मानवता का भाव उत्पन्न होता है। लेकिन जो लोग सनातन को बिना समझे उस पर प्रहार करते हैं, वे स्वयं अपने अज्ञान और संकीर्ण मानसिकता का परिचय देते हैं। सनातन को समाप्त करने का सपना देखने वालों को यह समझ लेना चाहिए कि सनातन न कभी समाप्त हुआ है, न होगा। यह अनादि है, अनंत है और युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा।

भारत की सांस्कृतिक आत्मा पर प्रहार करने वालों को देश की जनता लोकतंत्र के माध्यम से जवाब देगी। सनातन के विरोध में खड़े लोग क्षणिक राजनीतिक लाभ पा सकते हैं, लेकिन राष्ट्र की आत्मा के विरुद्ध चलने वाली सोच कभी स्थायी नहीं हो सकती। सनातन सत्य है, शाश्वत है और इसी कारण अजर-अमर है।

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