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किशनगंज : पोक्सो मामले में दोषी को 20 वर्ष की सजा

नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अदालत का अहम फैसला, पीड़िता को मिलेगा अर्थदंड की राशि

किशनगंज,11मई(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, किशनगंज में पोक्सो अधिनियम के तहत दर्ज एक गंभीर मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को कठोर सजा दी है। अनन्य विशेष न्यायाधीश पोक्सो अधिनियम दीप चंद पाण्डेय की अदालत ने सोमवार को नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए गए आरोपी नूर आलम को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 71 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अर्थदंड की राशि पीड़िता को दी जाएगी। यदि आरोपी अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त छह माह की सजा भुगतनी होगी।

यह मामला दिघलबैंक प्रखंड अंतर्गत सुल्तानगंज गांव से जुड़ा है, जहां दो वर्ष पूर्व नाबालिग के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। घटना के बाद पीड़िता के परिजनों द्वारा दिघलबैंक थाना में कांड संख्या 79/24 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। बाद में मामला पोक्सो वाद संख्या 51/24 के रूप में विशेष अदालत में विचाराधीन रहा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।

विशेष लोक अभियोजक मनीष कुमार साह ने अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए घटना की गंभीरता को रेखांकित किया। उन्होंने अदालत के समक्ष यह दलील रखी कि नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले अपराध समाज के लिए अत्यंत गंभीर चुनौती हैं और ऐसे मामलों में कठोर सजा आवश्यक है ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जा सके।

अभियोजन पक्ष की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषसिद्ध पाते हुए कठोर दंड सुनाया। अदालत के फैसले के बाद न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों के बीच इस निर्णय को लेकर चर्चा होती रही। कई लोगों ने इसे पीड़ित पक्ष के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। जानकारों का कहना है कि पोक्सो अधिनियम के तहत मामलों की त्वरित सुनवाई और दोषियों को कठोर सजा दिए जाने से बच्चों के खिलाफ अपराध पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

गौरतलब है कि पोक्सो अधिनियम यानी ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट’ बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया विशेष कानून है। इस कानून के तहत नाबालिगों के साथ दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न और अन्य अपराधों के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है।

हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में अदालतों द्वारा त्वरित सुनवाई और दोषियों को कठोर दंड दिए जाने के कई उदाहरण सामने आए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अदालतों का सख्त रुख समाज में अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा करता है। साथ ही यह पीड़ित परिवारों को यह भरोसा भी देता है कि न्याय व्यवस्था उनके साथ खड़ी है।

विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में पोक्सो मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ी है और अब पीड़ित परिवार खुलकर कानूनी सहायता लेने लगे हैं।

इस मामले में अदालत द्वारा पीड़िता को अर्थदंड की राशि देने का निर्देश भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पीड़ित पक्ष को आर्थिक और मानसिक रूप से कुछ राहत मिलती है।हालांकि ऐसे मामलों में सामाजिक और मानसिक प्रभाव लंबे समय तक बने रहते हैं, इसलिए पीड़ित बच्चों के पुनर्वास और काउंसलिंग की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। फिलहाल अदालत के फैसले के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

वहीं अभियोजन पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि अदालत के इस फैसले से समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को कड़ी चेतावनी मिलेगी।

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