भारत-नेपाल सीमा पर सख्ती की तैयारी, किशनगंज-अररिया के 34 गांवों में बनेंगे हाईटेक वॉच टावर

किशनगंज,26अप्रैल(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बढ़ती घुसपैठ और तस्करी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तैयार मास्टर प्लान के तहत सीमांचल के किशनगंज और अररिया जिलों के 34 सीमावर्ती गांवों में अत्याधुनिक वॉच टावर बनाए जाएंगे। इन वॉच टावरों को सिर्फ निगरानी के लिए ऊंचे ढांचे के रूप में नहीं, बल्कि हाईटेक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
प्रत्येक टावर में सायरन और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम लगाया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय लोगों को तुरंत सतर्क किया जा सके।
इस पहल का उद्देश्य सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है। सीमा सुरक्षा को लेकर गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब सीमा पिलरों के सर्वे और मॉनिटरिंग के लिए ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है।
सीमांचल से कोसी तक फैली करीब 231 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई पिलर क्षतिग्रस्त या लापता पाए गए हैं। प्रशासन द्वारा इनकी पहचान कर नए सीमा स्तंभ स्थापित करने का कार्य तेज कर दिया गया है।
प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने बताया कि बॉर्डर मैनेजमेंट के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह पूरी योजना केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत लागू की जा रही है। इसके तहत किशनगंज जिले के चार प्रखंडों के 22 गांवों और अररिया जिले के तीन प्रखंडों के 12 गांवों का चयन किया गया है।
इन गांवों में सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष अनुदान भी दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर समीक्षा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मई के पहले सप्ताह में दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। बैठक से पहले पटना से लेकर सीमावर्ती जिलों तक प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
भारत-नेपाल सीमा का यह क्षेत्र तस्करी और अवैध घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। वॉच टावरों के निर्माण के बाद सुरक्षा बलों को दूर से ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी, जिससे सीमा प्रबंधन और अधिक सुदृढ़ हो सकेगा।



