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सहरसा : स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 के नाम पर 70 लाख का वॉल पेंटिंग घोटाला, 30 लाख भुगतान पर उठे सवाल

चेयरमैन ने लगाई रोक, फिर भी निकासी; जांच और कार्रवाई की मांग तेज

सहरसा,05अप्रैल(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर नगर परिषद में ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2025’ के नाम पर वॉल पेंटिंग में बड़े पैमाने पर अनियमितता और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि मात्र सात दीवारों पर पेंटिंग कर 70 लाख रुपये का विपत्र तैयार किया गया, जिसमें से 30 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है। शेष राशि की निकासी की तैयारी के बीच नगर परिषद अध्यक्ष ने भुगतान पर रोक लगा दी है। मिली जानकारी के अनुसार नगर परिषद क्षेत्र में शहर को सुंदर बनाने के नाम पर सीमित स्थानों पर वॉल पेंटिंग का कार्य कराया गया, लेकिन इसके एवज में 70 लाख रुपये का बिल तैयार कर भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। मामले की जानकारी मिलने पर नगर परिषद अध्यक्ष ने कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिखकर भुगतान पर रोक लगाने का निर्देश दिया। बावजूद इसके आरोप है कि अध्यक्ष के निर्देश को नजरअंदाज करते हुए 30 लाख रुपये की निकासी कर ली गई। सामाजिक कार्यकर्ता पुनपुन यादव ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी से उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 के नाम पर भ्रष्टाचार का बड़ा खेल खेला गया है, जिससे नगर परिषद प्रशासन और शहरवासियों की छवि धूमिल हुई है। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक किसी भी बड़ी योजना को नगर परिषद बोर्ड की बैठक में पास करना अनिवार्य होता है, लेकिन इस योजना को बिना चर्चा और बिना पार्षदों की सहमति के लागू कर दिया गया। साथ ही आरोप लगाया गया कि न तो पारदर्शी ई-टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई और न ही कार्य की तकनीकी मापी कराई गई।पुनपुन यादव ने कहा कि एक ओर सिमरी बख्तियारपुर जलजमाव और गंदगी की समस्या से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर दिखावटी पेंटिंग के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा और न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।

मामले को और गंभीर बनाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 और 2024 में की गई पुरानी पेंटिंग को ही छोड़ दिया गया और नई योजना के नाम पर औपचारिक रंगाई कर भारी राशि निकालने की तैयारी की गई। कई स्थानों पर एक ही दीवार पर 2023, 2024 और 2025 अलग-अलग वर्ष अंकित दिखाई दे रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता ने 70 लाख रुपये की योजना की तकनीकी एवं प्रशासनिक ऑडिट कराने, भुगतान करने वाले पदाधिकारियों को चिन्हित कर निलंबित करने तथा ठेकेदार व संबंधित कर्मियों पर सरकारी धन के गबन का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। फिलहाल मामले को लेकर नगर परिषद क्षेत्र में चर्चा तेज है और लोग जांच कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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