
रांची/धनबाद: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जदयू विधायक सरयू राय ने ऐसा राजनीतिक प्रस्ताव रखा है, जिसने सत्ता समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने संकेत दिया है कि राज्य में बिना कांग्रेस और भाजपा के भी सरकार चलाने की संभावनाएं मौजूद हैं। दरअसल, हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार और कांग्रेस के बीच बढ़ती खींचतान के बीच सरयू राय ने नया रास्ता सुझाया है। उनका कहना है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) अपने सहयोगियों के साथ मिलकर स्वतंत्र रूप से सरकार चला सकता है।
क्या है सरयू राय का पूरा गणित?
सरयू राय ने मौजूदा विधानसभा के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि बहुमत के लिए जरूरी 41 विधायकों का आंकड़ा जेएमएम अपने दम पर जुटा सकता है। उनके अनुसार जेएमएम के पास 34 विधायक,आरजेडी के 4 विधायक, वामपंथी दलों के 2 विधायक और एक अन्य सहयोगी का समर्थन इन सबको मिलाकर बहुमत का आंकड़ा पूरा किया जा सकता है, जिससे न कांग्रेस (16 सीट) और न ही भाजपा (21 सीट) की जरूरत पड़ेगी।
‘बिना शर्त समर्थन’ का ऑफर
सरयू राय ने यह भी कहा कि अगर हेमंत सोरेन इस दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो वे खुद बाहर से बिना किसी शर्त के समर्थन देने को तैयार हैं। उनके इस बयान को झारखंड की राजनीति में संभावित बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सरयू राय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बिहार और असम चुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सहयोगी दलों को बराबरी का सम्मान नहीं देती।कहा कि पार्टी गठबंधन केवल अपने हितों के लिए करती है।
असम चुनाव के बाद बदल सकता है सियासी रुख
सरयू राय ने यह भी संकेत दिया कि असम चुनाव के नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने जेएमएम को अपने मौजूदा गठबंधन पर पुनर्विचार करने की सलाह दी।
अफसरों को लेकर भी उठाए सवाल
अपने बयान में राय ने यह भी कहा कि राज्य के अधिकारियों को ‘माफिया’ कहना सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने हेमंत सोरेन को सलाह दी कि वे इन विवादों से निकलकर नई राजनीतिक दिशा तय करें।
कुल मिलाकर, सरयू राय का यह प्रस्ताव झारखंड की मौजूदा सियासत में एक नया मोड़ ला सकता है। अब देखना होगा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और उसके सहयोगी इस सुझाव पर क्या रुख अपनाते हैं।
